
नूर मोहम्मद/ (सर्वव्यापी)
समावेशी शिक्षा को केवल योजनाओं तक सीमित न रखते हुए उसे धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी के नेतृत्व में शिक्षा विभाग लगातार संवेदनशील पहल कर रहा है। इसी क्रम में विकासखंड संसाधन केंद्र गौरेला के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बालक अयांश को चलने-फिरने में सहूलियत प्रदान करने के उद्देश्य से वॉकर उपलब्ध कराया गया।इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने कहा कि प्रत्येक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को उसकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण, शैक्षणिक सहयोग एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। उनका कहना था कि समावेशी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे भी समान अवसरों के साथ अपने भविष्य का निर्माण कर सकें।उन्होंने कहा कि वॉकर जैसे सहायक उपकरण केवल चलने-फिरने में मदद नहीं करते, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास का संचार करते हैं, उनकी दैनिक गतिविधियों को सरल बनाते हैं तथा उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अयांश को वॉकर प्रदान करते हुए उन्होंने उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में बीआरसी समन्वयक संतोष सोनी,फिजियोथेरेपिस्ट प्राची पीटर्स, स्पेशल एजुकेटर राजेन्द्र साहू, बीआरपी प्रवीण कुमार चौधरी तथा अजय जोशी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी की यह पहल दर्शाती है कि शिक्षा विभाग विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए केवल औपचारिकता नहीं निभा रहा, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे है।




