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बारिश से फसलों को बचाने कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी, पशुधन की सुरक्षा पर भी जोर।

विकास नंद/सर्वव्यापी

चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से आगामी दिनों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने किसानों के लिए मौसम आधारित एडवाइजरी जारी की है। उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने किसानों से सतर्कता बरतने और फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक उपाय करने की अपील की है। विभाग ने धान, दलहन एवं तिलहन की पककर तैयार फसलों की कटाई फिलहाल टालने, कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने तथा खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी है।

दो से चार दिन फसल कटाई रोकने की सलाह

भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में प्रतिकूल मौसम की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि धान, दलहन एवं तिलहन की खड़ी फसलें पकने की अवस्था में हैं, तो मौसम की स्थिति के अनुसार अगले दो से चार दिनों तक कटाई स्थगित रखें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसल को तत्काल ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं।फसल को तिरपाल से ढंकते समय इस बात का ध्यान रखें कि बारिश का पानी जमा न हो और फसल के नीचे नमी न बनी रहे। खेतों में अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी की समुचित व्यवस्था करें। कटाई, मड़ाई और सुखाई के लिए साफ एवं सूखे स्थान पहले से तैयार रखें। तेज हवा, भारी बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका के दौरान खेतों में काम करने से बचें।

तिवरा-अलसी की बुवाई टालें, मौसम साफ होने पर करें रबी की तैयारी

कृषि विभाग ने उतेरा फसल के रूप में तिवरा एवं अलसी की बुवाई करने वाले किसानों को फिलहाल कुछ दिनों तक बुवाई स्थगित रखने की सलाह दी है। रबी फसलों की बुवाई मौसम साफ होने के बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने को कहा गया है।किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने की भी सलाह दी गई है। कीट एवं रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद उचित कीटनाशक और कवकनाशक का इस्तेमाल करें। वहीं, गीली फसल को लंबे समय तक ढेर में बंद करके रखने से बचें। अनाज को साफ एवं हवादार स्थान पर रखकर उपयुक्त नमी स्तर तक सुखाने के बाद ही भंडारित करें। बीज के लिए रखी गई फसल को अलग सुरक्षित रखें, ताकि उसकी अंकुरण क्षमता बनी रहे। भंडारण स्थल की छत, फर्श और जल निकासी की व्यवस्था भी दुरुस्त रखें।

सब्जियों और उद्यानिकी फसलों को बचाने के निर्देश

बारिश एवं तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए सब्जियों और उद्यानिकी फसलों में पककर तैयार उपज की शीघ्र कटाई कर बाजार भेजने की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। बागवानी फसलों में उर्वरकों का प्रयोग मौसम साफ होने के बाद ही करें।फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, खीरा और पछेती करेला जैसी रबी मौसम की सब्जियों की बुवाई अथवा रोपाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है। करेला, लौकी और अन्य कद्दूवर्गीय लता वाली सब्जियों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा दें। केले के जिन पौधों में फूल एवं फल आ चुके हैं, उन्हें बांस का सहारा देकर सुरक्षित रखें।वर्षा के बाद पौधों की पत्तियों पर धब्बे, तनों में सड़न और जड़ों से संबंधित समस्याओं की नियमित जांच करें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर सही पहचान के बाद ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं। खेतों में पानी जमा न होने दें और निकासी की व्यवस्था बनाए रखें।

पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने की अपील

कृषि विभाग ने पशुपालकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। संभावित बारिश और तेज हवाओं के दौरान पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें। आकाशीय बिजली की आशंका होने पर पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय न लें। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध रखें। हरे चारे, सूखे चारे और पशु आहार को बारिश से सुरक्षित स्थान पर भंडारित करें।पशुओं में अचानक सुस्ती, भूख में कमी, दस्त या सांस संबंधी परेशानी दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

फसल खराब होने पर तुरंत दें सूचना, बीमा दावा करने में न करें देरी

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदा या प्रतिकूल मौसम के कारण फसल को नुकसान होने पर बीमित किसान तत्काल संबंधित बीमा कंपनी अथवा कृषि विभाग को इसकी सूचना दें। फसल क्षति की तस्वीरें और अन्य जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखें। फसल बीमा के तहत दावा प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन करना भी जरूरी है।कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतने से फसलों, उद्यानिकी उपज और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।

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