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बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, छात्रावासों का औचक निरीक्षण करने पहुंचे वेदराम मनहरे।

विकास नंद/सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष वेदराम मनहरे ने गुरुवार को महासमुंद जिला मुख्यालय स्थित अनुसूचित जाति के प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रावासों में विद्यार्थियों के रहन-सहन, खानपान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

विद्यार्थियों से की आत्मीय चर्चा

निरीक्षण के दौरान आयोग के उपाध्यक्ष मनहरे ने छात्रावास में रह रहे बच्चों के साथ बैठकर उनकी पढ़ाई-लिखाई, शैक्षणिक गतिविधियों और भविष्य के लक्ष्यों के बारे में आत्मीयता से चर्चा की। उन्होंने बच्चों से उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में भी जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बिना किसी झिझक के अपनी बातें उनके सामने रखीं।छात्रावासों में बच्चों के बीच हंसी-खुशी और पारिवारिक माहौल देखकर मनहरे ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें और भविष्य में सफलता हासिल कर सकें।

अधीक्षकों को दिए आवश्यक निर्देश

निरीक्षण के दौरान मनहरे ने छात्रावास अधीक्षक ऋतु चंद्राकर, चित्ररेखा तारक और खंड प्रभारी नीलेश खांडे से चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावास में रहने वाले प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना सभी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी के निर्वहन में किसी भी स्तर पर चूक नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि छात्रावास केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह है, जहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण के साथ स्नेह, सहयोग और उचित मार्गदर्शन मिलना चाहिए। छात्रावास में रहने वाले सभी बच्चे हमारे अपने हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विद्यार्थियों के हितों की रक्षा आयोग की प्राथमिकता

आयोग के उपाध्यक्ष मनहरे ने कहा कि अनुसूचित जाति समाज के अधिकारों की रक्षा, उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण तथा विद्यार्थियों के हितों और सुरक्षा का संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आयोग अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए समाज के हितों की रक्षा और जनसमस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।इस अवसर पर अरविंद प्रहरे और मेघराज चंद्रसेन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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