
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला बिलासपुर के जिला अध्यक्ष सुनील पाण्डेय ने राज्य के कर्मचारियों एवं शिक्षकों को केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता प्रदान करने तथा लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स का भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों को उनके वास्तविक आर्थिक अधिकारों से वंचित रखना उचित नहीं है। केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में अंतर होने से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों एवं शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।जिला अध्यक्ष सुनील पाण्डेय ने कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों के वेतन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करना है। जब केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का लाभ देती है, तो राज्य सरकार को भी उसी अनुरूप प्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों को लाभ प्रदान करना चाहिए। महंगाई भत्ते में अंतर और लंबित एरियर्स का भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि जनवरी 2017 से जुलाई 2026 तक की लंबित महंगाई भत्ता राशि के एरियर्स को लेकर कर्मचारियों में लंबे समय से असंतोष है। इस अवधि के एरियर्स के भुगतान में देरी से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। यह राशि कर्मचारियों के वर्षों के सेवाकाल और उनके वैधानिक आर्थिक हितों से जुड़ी हुई है। इसलिए राज्य सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए लंबित राशि के भुगतान की दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए।सुनील पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक और कर्मचारी शिक्षा व्यवस्था सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में उनकी आर्थिक मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना सरकार की जिम्मेदारी है।फेडरेशन की प्रमुख मांगेंप्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों को केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए।लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स की गणना कर नियमानुसार भुगतान किया जाए।महंगाई भत्ते में केंद्र एवं राज्य के बीच होने वाले अंतर को समाप्त करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़े लंबित विषयों पर कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद कर समयबद्ध निर्णय लिया जाए।अंत में जिला अध्यक्ष सुनील पाण्डेय ने राज्य शासन से मांग की कि कर्मचारियों एवं शिक्षकों की इन जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर उन्हें आर्थिक राहत प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा, सम्मानजनक सेवा-शर्तें और समय पर आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना सुशासन की महत्वपूर्ण पहचान है।




