
विकास नंद (सर्वव्यापी)

राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री सरला कोसरिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिलना पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है और लगातार मिल रही चुनावी पराजय से पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है।
सरला कोसरिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई। उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। उनके अनुसार, यह स्थिति कांग्रेस के राजनीतिक दावों और जमीनी समर्थन को लेकर सवाल खड़े करती है।
चुनावी हार पर किसे ठहराएगी जिम्मेदार?
सरला कोसरिया ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी पार्टी को चुनावों में हार का सामना करना पड़ता है, तब वह मतदान प्रक्रिया और चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने पूछा कि जब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली, तो अब पार्टी अपनी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएगी?उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास और समर्थन ही किसी राजनीतिक दल की असली ताकत होता है। चुनाव परिणामों को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस को अपनी रणनीति, कार्यशैली और जनसंपर्क की समीक्षा करनी चाहिए।
जनता के विश्वास पर खरा उतरना जरूरी
सरला कोसरिया ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव परिणाम जनता के फैसले को सामने रखते हैं। राजनीतिक दलों को हार-जीत से सीख लेकर जनता के मुद्दों पर काम करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से राजनीतिक स्थिति नहीं बदलती, बल्कि जनता के बीच विश्वास कायम करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि लगातार मिल रहे चुनावी नतीजों से कांग्रेस को सबक लेना चाहिए और अपनी राजनीतिक रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।




