
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
नवरात्र पर्व के पावन अवसर पर बिलासपुर रेलवे फाटक, तारबहार के पास स्थित सार्वजनिक काली मंदिर एवं श्री श्री श्री 1008 धूनी वाले दादा दरबार में भक्ति और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला। मां दुर्गा की आराधना के इस पावन पर्व पर मंदिर में आस्था के दीप प्रज्वलित हुए और श्रद्धा की ज्योति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। मां के दर्शन, पूजा-अर्चना और आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इन नौ दिनों में माता रानी के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा और विश्वास विशेष रूप से दिखाई देता है। सार्वजनिक काली मंदिर में प्रज्वलित आस्था के दीप इसी विश्वास और समर्पण का संदेश देते हैं। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण के बीच भक्तिभाव से मां की आराधना का महत्व और भी बढ़ जाता है।तारबहार रेलवे फाटक के समीप स्थित यह धार्मिक स्थल श्रद्धा और आस्था के भाव से जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक काली मंदिर के साथ श्री श्री श्री 1008 धूनी वाले दादा दरबार की धार्मिक पहचान भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। नवरात्र के अवसर पर मां के प्रति समर्पण और पूजा-अर्चना का भाव भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को जीवंत करता है, जिसमें दीप प्रज्वलन को अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक माना जाता है।*आस्था की ज्योति से जगमगाया मंदिर परिसर*नवरात्र में जलने वाला प्रत्येक दीप श्रद्धा, विश्वास और मनोकामनाओं का प्रतीक है। मां के चरणों में शीश नवाकर भक्त अपने जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। मां दुर्गा की उपासना का यह पर्व समाज में सद्भाव, सेवा, संयम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी देता है।बिलासपुर के तारबहार क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक काली मंदिर एवं श्री श्री श्री 1008 धूनी वाले दादा दरबार में नवरात्र के दौरान प्रज्वलित आस्था के दीप इस शाश्वत विश्वास को अभिव्यक्त करते हैं कि जहां श्रद्धा होती है, वहां विश्वास की ज्योति कभी बुझती नहीं। मां की भक्ति में समर्पित यह पावन अवसर भक्तों के मन में नई ऊर्जा, नई आशा और सकारात्मकता का संचार करने वाला है।




