
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग अंर्तगत जांजगीर-चांपा जिले के पुलिस विभाग से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर महिला पुलिसकर्मियों से वर्दी में ही शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ू-पोंछा कराया जाता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था और महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।मामले को लेकर एक महिला पुलिसकर्मी का कथित बयान भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आ रही है। यदि वायरल वीडियो और बयान की पुष्टि होती है, तो यह केवल सफाई व्यवस्था का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पुलिसकर्मियों से उनके निर्धारित दायित्व से इतर किस परिस्थिति में ऐसे कार्य कराए गए, इसकी विभागीय जांच का विषय बन सकता है।वीडियो वायरल, फिर भी कार्रवाई कहां तक पहुंची?सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर वीडियो और कथित बयान के प्रसारित होने के बाद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई? क्या पुलिस विभाग ने वीडियो की सत्यता की जांच कराई? क्या संबंधित महिला पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए? यदि जांच शुरू हुई है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?पुलिस विभाग में अनुशासन और अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ व्यवहार को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक मानदंड हैं। ऐसे में वायरल वीडियो की वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।महिला पुलिसकर्मियों की गरिमा से जुड़ा सवालमहिला पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और पुलिसिंग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। ऐसे में यदि उनसे वर्दी में शौचालय की सफाई या झाड़ू-पोंछा कराया जाना प्रमाणित होता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसा निर्देश किस स्तर से दिया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।वहीं, यदि वीडियो पुराना है, संदर्भ से काटकर प्रसारित किया गया है अथवा उसमें दिखाई दे रही परिस्थितियां वैसी नहीं हैं जैसी सोशल मीडिया पर बताई जा रही हैं, तो पुलिस विभाग को भी तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।जांच और जवाबदेही की जरूरतमामले में फिलहाल सबसे जरूरी है कि वायरल वीडियो की तकनीकी एवं विभागीय स्तर पर जांच कराई जाए और संबंधित महिला पुलिसकर्मियों के बयान स्वतंत्र रूप से दर्ज किए जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वीडियो कब और कहां बनाया गया तथा उस समय संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका थी।वायरल वीडियो अपने आप में आरोप का अंतिम प्रमाण नहीं है, लेकिन यदि उसमें दिखाई दे रही घटना वास्तविक पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई किए जाने का सवाल जरूर उठता है।




