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राजनीति अपनी जगह, परिवार अपनी जगह: अमित जोगी की पोस्ट ने बयां किया सुकून का रिश्ता।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

राजनीति की चकाचौंध, चुनावी उतार-चढ़ाव और सत्ता की दौड़ से इतर जिंदगी में परिवार का अपना एक अलग संसार होता है। मरवाही विधानसभा के पूर्व विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर और उसके साथ लिखी गई कुछ पंक्तियां इसी पारिवारिक सुकून और अपनापन की कहानी बयां करती नजर आईं।अमित जोगी ने अपनी पत्नी ऋचा जोगी और अपनी मां, पूर्व विधायक डॉ. रेणु जोगी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा—“रायपुर जिला न्यायालय में दिनभर काम करने के बाद घर लौटना—माँ की खुशी, पत्नी का प्यार और मेरी दिनभर की सबसे प्यारी कमाई: उनका पकाया खास मुर्ग मुसल्लम।”अमित जोगी की यह पोस्ट राजनीतिक बयानबाजी से अलग एक पारिवारिक तस्वीर पेश करती है। तस्वीर में परिवार के साथ बिताए पलों और घर के खाने के प्रति उनका अपनापन साफ दिखाई देता है। खास बात यह है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे एक राजनीतिक परिवार की यह झलक सत्ता, चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों से दूर दिखाई देती है।—–//—-

राजनीति बदलती रहती है, परिवार साथ रहता है

राजनीति में परिस्थितियां कभी एक जैसी नहीं रहतीं। सत्ता आती-जाती है, चुनावी समीकरण बदलते हैं और राजनीतिक भूमिकाएं भी समय के साथ बदलती रहती हैं। कभी सत्ता के केंद्र में रहने वाले नेता विपक्ष में होते हैं तो कभी सक्रिय राजनीति से कुछ दूरी बनाकर अपने निजी जीवन को समय देते हैं।अमित जोगी का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। मरवाही से विधायक के रूप में विधानसभा पहुंचने वाले अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन राजनीति के इन उतार-चढ़ावों के बीच उनकी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट का केंद्र न तो कोई राजनीतिक मुद्दा है और न ही कोई चुनावी संदेश—बल्कि मां, पत्नी और घर का भोजन है।यही वजह है कि यह पोस्ट सामान्य राजनीतिक पोस्ट से अलग नजर आती है।—–//—-

मां की खुशी और पत्नी के प्यार को बताया ‘कमाई’

अमित जोगी ने अपने पोस्ट में जिस तरह “माँ की खुशी” और “पत्नी का प्यार” को दिनभर की सबसे प्यारी कमाई से जोड़ा, वह उनके निजी जीवन के एक भावनात्मक पक्ष को सामने लाता है। राजनीतिक जीवन में जहां उपलब्धियों को अक्सर पद, चुनावी जीत या प्रभाव से जोड़ा जाता है, वहीं इस पोस्ट में दिनभर की सबसे बड़ी खुशी परिवार के साथ जुड़ी हुई दिखाई देती है।खास मुर्ग मुसल्लम का उल्लेख भी पोस्ट को सहज और घरेलू बना देता है। यानी दिनभर की व्यस्तता और काम के बाद घर लौटने पर मिलने वाला परिवार का प्यार और अपनेपन का खाना ही उनके लिए खास मायने रखता है।—–//—-

जोगी परिवार की तस्वीर में राजनीति से ज्यादा परिवार

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के परिवार का छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। डॉ. रेणु जोगी भी विधायक रह चुकी हैं और अमित जोगी स्वयं मरवाही विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसलिए जोगी परिवार से जुड़ी कोई भी सार्वजनिक तस्वीर अक्सर राजनीतिक नजरिए से देखी जाती है।लेकिन इस तस्वीर में राजनीतिक संदेश तलाशने के बजाय इसे परिवार के एक सामान्य, आत्मीय और सुकून भरे पल के रूप में देखना ज्यादा स्वाभाविक है। मां, पत्नी और बेटे की यह तस्वीर उस पारिवारिक रिश्ते को सामने लाती है, जो राजनीतिक पहचान से अलग होता है।—–//—-

नेता बनने के बाद बढ़ जाता है अहंकार, लेकिन सुकून की कीमत अलग

सार्वजनिक जीवन में आने के बाद पद और प्रतिष्ठा व्यक्ति के आसपास एक अलग तरह का वातावरण बना देते हैं। कई बार राजनीतिक सफलता के साथ व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव की चर्चाएं भी होती हैं। लेकिन अंततः राजनीति और पद स्थायी नहीं होते। चुनावी परिणाम बदलते हैं, जिम्मेदारियां बदलती हैं और समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां भी बदल जाती हैं।

ऐसे में अमित जोगी की यह पोस्ट एक अलग संदेश देती दिखाई देती है—राजनीति अपनी जगह है और परिवार अपनी जगह।दिनभर न्यायालय में काम करने के बाद घर लौटकर मां की खुशी, पत्नी का प्यार और अपने हाथ से नहीं बल्कि अपनों के हाथ से बने भोजन में खुशी तलाशना शायद उस सुकून को दर्शाता है, जिसकी तलाश राजनीति की भीड़ में अक्सर मुश्किल हो जाती है।राजनीतिक जीवन रात-दिन की तरह बदलता रहता है, लेकिन परिवार के साथ बिताया गया समय और अपनों का साथ किसी चुनावी परिणाम का मोहताज नहीं होता। अमित जोगी की यह तस्वीर और उनका छोटा-सा संदेश इसी मानवीय पक्ष को सामने लाता है।सत्ता और राजनीति का दौर चाहे जैसा हो, आखिरकार घर लौटने पर मां की मुस्कान, पत्नी का प्यार और परिवार के साथ बैठकर खाना ही जिंदगी की उन खुशियों में शामिल है, जिनकी कोई राजनीतिक कीमत नहीं होती।

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