
विकास नंद/ सर्वव्यापी
धान की पारंपरिक खेती के साथ दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। सरायपाली विकासखंड के ग्राम जंगलबेड़ा के प्रगतिशील किसान विष्णु कुमार ओगरे ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन योजना के तहत मूंगफली की खेती कर बेहतर आय का उदाहरण प्रस्तुत किया है।भारत सरकार की राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2025 में आयोजित मूंगफली प्रदर्शन कार्यक्रम में किसान विष्णु कुमार ओगरे ने सहभागिता की। उन्होंने 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की उन्नत किस्म कादरी लिपाक्षी (के-1812) की खेती की। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और फसल की नियमित निगरानी जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया गया।प्रदर्शन क्षेत्र में निर्धारित दर के अनुसार 40 किलोग्राम बीज की बुवाई की गई। उन्नत बीज और वैज्ञानिक प्रबंधन के परिणामस्वरूप फसल की अच्छी वृद्धि हुई। कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी कर आवश्यक नियंत्रण उपाय भी अपनाए गए।फसल तैयार होने पर किसान को कुल 10 क्विंटल मूंगफली का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में मूंगफली 80 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचने पर 80 हजार रुपए की सकल आय हुई। खाद, मजदूरी सहित खेती की लागत निकालने के बाद किसान ने 60 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
किसान विष्णु कुमार ओगरे ने बताया कि कृषि विभाग सरायपाली द्वारा उपलब्ध कराए गए उन्नत बीज और समय-समय पर मिले तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें मूंगफली की खेती में बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ बाजार की मांग, मिट्टी और जलवायु की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए दलहन एवं तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों को भी अपनाना चाहिए।
मूंगफली की खेती से मिली यह सफलता फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित करती है।



