
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गत 17 सितंबर 2026 को देशभर में भगवान विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन एक साथ मनाया गया। छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में विश्वकर्मा पूजा, श्रमिक महासम्मेलन और प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित हुए। इसी बीच मुख्यमंत्री साय के एक सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर उनके संबोधन में प्रयुक्त शब्द को लेकर चर्चा तेज हो गई है।वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को ‘जयंती’ के रूप में संबोधित किया। यदि वीडियो में शब्दों का यही प्रयोग हुआ है, तो सवाल यह है कि क्या यह केवल भाषण के दौरान हुई शब्दगत चूक थी या फिर राजनीतिक-सांस्कृतिक संबोधन में शब्दों के चयन को लेकर कोई अलग दृष्टिकोण था?दरअसल, ‘जन्मदिन’ और ‘जयंती’ समानार्थी शब्द नहीं हैं। सामान्य प्रयोग में जीवित व्यक्ति के जन्मदिवस के लिए ‘जन्मदिन’ तथा किसी महापुरुष, ऐतिहासिक अथवा पूजनीय व्यक्तित्व की जन्मतिथि के स्मरणोत्सव के लिए ‘जयंती’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसलिए सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के भाषण में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन सकता है।दिलचस्प बात—सरकारी संदेश में दोनों शब्द अलग-अलगइस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 17 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री साय के नाम से जारी समाचार/संदेश में भगवान विश्वकर्मा के लिए “विश्वकर्मा जयंती” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए स्पष्ट रूप से “जन्मदिन” शब्द का प्रयोग दर्ज है। संदेश में कहा गया कि एक ओर भगवान विश्वकर्मा की जयंती है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है।यानी आधिकारिक तौर पर जारी इस संदेश में दोनों अवसरों के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। यही वजह है कि वायरल वीडियो में यदि मुख्यमंत्री के मुंह से ‘जयंती’ शब्द सुनाई देता है, तो सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय शब्दों के अंतर और संदर्भ के आधार पर भी देखा जाना चाहिए।क्या यह महज जुबान फिसलना है?मुख्यमंत्री के भाषणों में किसी शब्द का गलत उच्चारण या तत्काल शब्द-चयन होना असामान्य नहीं है। लेकिन जब वही शब्द किसी संवेदनशील या सार्वजनिक महत्व के संदर्भ में सोशल मीडिया वीडियो के रूप में प्रसारित होने लगे, तो चर्चा स्वाभाविक हो जाती है।इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड यह भी बताता है कि मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को लेकर अलग से प्रदेशवासियों से ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील की थी और प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करने को कहा था।इसलिए वायरल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर प्रधानमंत्री के जन्मदिन को ‘जयंती’ कहा, उपलब्ध सामग्री के आधार पर उचित नहीं होगा। इसके लिए पूरा वीडियो, कार्यक्रम का संदर्भ और मुख्यमंत्री के पूरे वक्तव्य को देखना जरूरी होगा।सोशल मीडिया ने पकड़ लिया शब्द, अब जवाब की नजरराजनीतिक भाषणों में शब्दों का महत्व होता है। खासकर तब, जब बात मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सार्वजनिक संबोधन की हो। सोशल मीडिया के दौर में भाषण का कुछ सेकंड का हिस्सा भी व्यापक बहस का विषय बन सकता है।यह मामला भी फिलहाल इसी वजह से चर्चा में है—क्या मुख्यमंत्री साय से शब्दों का चयन करने में चूक हुई, या वायरल वीडियो का छोटा हिस्सा पूरे संदर्भ को नहीं दिखाता?फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक सामग्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘जन्मदिन’ और भगवान विश्वकर्मा के लिए ‘जयंती’ शब्द का स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।ऐसे में वायरल वीडियो को लेकर उठे सवालों का अंतिम उत्तर पूरे वीडियो के संदर्भ और मुख्यमंत्री कार्यालय की स्पष्ट प्रतिक्रिया से ही सामने आएगा।सवाल सिर्फ एक शब्द का नहीं है—सवाल यह है कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की शुद्धता और उनके अर्थ की गंभीरता को कितना महत्व दिया जाना चाहिए?



