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मेडिकल अवकाश भुगतान घोटाले में दो प्रभारी बीईओ पर एफआईआर की आहट,एक शिक्षक जेल में, शिक्षक पत्नी लापता; पुलिस तलाश में — बिल्हा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के विकासखंड शिक्षा कार्यालय बिल्हा में सामने आए कथित मेडिकल अवकाश भुगतान घोटाले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मामले में एक शिक्षक के जेल जाने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। वहीं, संबंधित प्रकरण से जुड़ी बताई जा रही एक शिक्षिका के लापता होने और पुलिस द्वारा उसकी तलाश किए जाने की चर्चा ने पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया है। इसी बीच अब इस प्रकरण में बिल्हा विकासखंड शिक्षा विभाग के दो तत्कालीन प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आ रही है और दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।मेडिकल अवकाश के नाम पर किए गए भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। आखिर मेडिकल अवकाश स्वीकृति और उसके आधार पर भुगतान की प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई? दस्तावेजों की जांच किस अधिकारी ने की? भुगतान से पहले सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी थी? और यदि अनियमित भुगतान हुआ तो लंबे समय तक वह विभागीय स्तर पर पकड़ में क्यों नहीं आया? इन सवालों के जवाब अब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।एक शिक्षक जेल में, मामले ने पकड़ा तूलइस कथित मेडिकल भुगतान घोटाले में एक शिक्षक के जेल में बंद होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला पहले ही गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की चर्चा ने शिक्षा महकमे में बेचैनी बढ़ा दी है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि भुगतान प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की भूमिका रही या नियमों की अनदेखी करते हुए भुगतान कराया गया, तो जिम्मेदारी तय होना स्वाभाविक माना जा रहा है।हालांकि अधिकारियों की आपराधिक भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। एफआईआर दर्ज होने की स्थिति में पुलिस दस्तावेजों, भुगतान अभिलेखों, मेडिकल प्रमाण-पत्रों, अवकाश स्वीकृति संबंधी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के निर्णयों की पड़ताल कर सकती है।शिक्षक पत्नी के लापता होने से बढ़ी पेचीदगीमामले से जुड़ी बताई जा रही एक शिक्षक पत्नी के लापता होने की जानकारी ने प्रकरण को और पेचीदा बना दिया है। पुलिस द्वारा उसकी तलाश किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि उसके लापता होने के वास्तविक कारण और मेडिकल भुगतान घोटाले से उसका सीधा संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति के लापता होने मात्र से उसके विरुद्ध किसी अपराध में संलिप्तता निष्कर्षित नहीं की जा सकती। पुलिस की तलाश और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।अब अधिकारियों की जवाबदेही पर नजरपूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल अब विभागीय जवाबदेही का है। यदि किसी कर्मचारी को मेडिकल अवकाश के आधार पर वेतन अथवा अन्य भुगतान किया गया, तो उसके पीछे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों का परीक्षण और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में कथित गड़बड़ी सामने आने पर यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि भुगतान किस स्तर से स्वीकृत हुआ और संबंधित अभिलेखों की जांच किस अधिकारी ने की थी।दो प्रभारी बीईओ की भूमिका जांच के घेरे में आने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि जांच एजेंसियों को भुगतान प्रक्रिया में प्रथमदृष्टया अनियमितता या अधिकारियों की लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं, तो कार्रवाई का दायरा कर्मचारियों से आगे बढ़कर जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच सकता है।दस्तावेज बताएंगे घोटाले की असली तस्वीरअब इस पूरे मामले में मेडिकल प्रमाण-पत्रों की सत्यता, अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया, वेतन भुगतान के रिकॉर्ड, कार्यालयीन नोटशीट, संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर तथा भुगतान से जुड़े डिजिटल और भौतिक अभिलेख महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। यदि दस्तावेजों में विरोधाभास मिलता है अथवा नियमों को दरकिनार कर भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है, तो मामला केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं रह सकता।बिल्हा के शिक्षा विभाग में सामने आया यह प्रकरण अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां जांच की दिशा यह तय करेगी कि कथित मेडिकल भुगतान अनियमितता के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर की गई गड़बड़ी थी अथवा पूरी प्रक्रिया में कहीं न कहीं संस्थागत स्तर पर भी चूक हुई।एफआईआर हुई तो खुल सकते हैं कई राजदो प्रभारी बीईओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावित कार्रवाई ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। यदि पुलिस मामला दर्ज करती है तो पूछताछ और दस्तावेजी जांच के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित भुगतान किस परिस्थिति में हुआ, किसने प्रस्ताव तैयार किया, किसने सत्यापन किया और अंतिम स्वीकृति किस स्तर से मिली।फिलहाल निगाहें पुलिस जांच और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। एक ओर एक शिक्षक के जेल में होने की स्थिति, दूसरी ओर संबंधित बताई जा रही शिक्षिका की तलाश और अब दो प्रभारी बीईओ पर संभावित एफआईआर की चर्चा—इन घटनाक्रमों ने बिल्हा के मेडिकल अवकाश भुगतान प्रकरण को साधारण विभागीय अनियमितता के बजाय गंभीर जांच का विषय बना दिया है।अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मेडिकल अवकाश के नाम पर कितना भुगतान हुआ, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि भुगतान की पूरी व्यवस्था में जिम्मेदारी किसकी थी और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की स्थिति में जवाबदेह कौन होगा? जांच की अगली कार्रवाई ही इन सवालों का जवाब देगी।

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