
नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ,गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)
जिले में वन उत्पादों के बेहतर संग्रहण, संरक्षण, संवर्धन और विपणन के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित अरपा सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कलेक्टर विजय दयाराम के. की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में वन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा सामुदायिक एवं महिला नेतृत्व को प्रभावी बनाने की रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया।कार्यशाला में फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी की राज्य प्रमुख मंजीत कौर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि तथा गैर-सरकारी संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला का आयोजन जिला पंचायत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, नव निर्माण चेतना मंच और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी (एफईएस) के संयुक्त प्रयास से किया गया।
लघु वनोपज को आय का मजबूत आधार बनाने पर जोर
कार्यशाला में बताया गया कि जिले के वन क्षेत्रों से प्राप्त लघु वनोपज ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। यदि इनके सतत संग्रहण के साथ प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण और बेहतर विपणन की व्यवस्था विकसित की जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम सभा, सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों, पंचायतों और महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को अहम बताया गया।
पंचायत स्तर पर प्राकृतिक संसाधनों की बनेगी बेहतर योजना
बैठक में प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए पंचायत स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का परिसंपत्ति रजिस्टर तैयार करने तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं के अभिसरण से संरक्षण एवं आजीविका गतिविधियों को गति देने पर चर्चा हुई। सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों को मजबूत करने और ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया।
महिला समूहों को संग्रहण से बाजार तक जोड़ने की पहल
कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों को केवल संग्रहण तक सीमित न रखते हुए उन्हें रिकॉर्ड संधारण, प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण और विपणन की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया। महिला समूहों को वित्तीय संस्थाओं से जोड़कर उद्यम विकास को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
दानीकुंडी का सीताफल मॉडल बना चर्चा का केंद्र
वन आधारित आजीविका के क्षेत्र में जिले में किए जा रहे सफल प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। मरवाही विकासखंड के दानीकुंडी स्थित वनधन केंद्र में सीताफल संग्रहण और सीधे विक्रय के उदाहरण को प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि स्थानीय वन उत्पादों को संगठित तरीके से बाजार से जोड़कर ग्रामीणों की आय बढ़ाई जा सकती है।
स्थानीय बाजार और वनधन केंद्रों से जोड़ने की रणनीति
कार्यशाला में वन उत्पादों को स्थानीय हाट-बाजार, वनधन केंद्रों और अन्य विपणन माध्यमों से जोड़ने, गांव स्तर पर भंडारण की सुविधाएं विकसित करने तथा बाजार की मांग के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई। उत्पादन, लागत और बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी गतिविधियों की पहचान करने पर जोर दिया गया, जिनसे ग्रामीणों को अधिक लाभ मिल सके।
युवाओं को जैव विविधता और प्रकृति आधारित गतिविधियों से जोड़ने पर जोर
युवाओं को प्रकृति और जैव विविधता आधारित गतिविधियों से जोड़ने के लिए इको-टूरिज्म वॉक, जैव विविधता पर समर स्कूल तथा स्कूलों और गांवों में ‘विजडम वॉक’ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इसके माध्यम से युवाओं में स्थानीय जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ रोजगार की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय से मजबूत होगी वन आधारित अर्थव्यवस्था
कार्यशाला में वन विभाग, कृषि, उद्यानिकी, पशुधन, महिला एवं बाल विकास, खाद्य, आजीविका महाविद्यालय, बिहान-एनआरएलएम, पंचायत विभाग सहित विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता रही। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि वन उत्पादों का संरक्षण और सतत उपयोग ग्रामीण समुदायों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यम के नए अवसर पैदा कर सकता है। इसके लिए विभागों, पंचायतों, ग्राम सभाओं, सामुदायिक संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों के बीच समन्वय को और मजबूत करना आवश्यक है।


