
विकास नंद/सर्वव्यापी
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की गहन समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, सुलभ और जनहितकारी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि मरीजों का उपचार केवल चिकित्सकीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सकारात्मक व्यवहार के साथ किया जाए।
बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलू धृतलहरे, सभी बीएमओ, चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक के दौरान राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (टीबी) की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने वर्ष 2026 तक टीबी मुक्त पंचायत, टीबी मुक्त विकासखंड और टीबी मुक्त जिला बनाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच, उपचार तथा उपचार पूरा होने तक नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कलेक्टर ने कहा कि निक्षय पोषण योजना सहित टीबी मरीजों को मिलने वाली सभी सुविधाओं का समय पर लाभ मिले तथा जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में टीबी उन्मूलन को जन आंदोलन का स्वरूप देने की बात कही।
बैठक में जानकारी दी गई कि जिले की 305 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं, जबकि वर्तमान में 754 टीबी मरीज उपचाररत हैं।
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने रोगियों की शीघ्र पहचान, नियमित उपचार और दिव्यांगता की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने घर-घर सर्वे और जनजागरूकता गतिविधियों में तेजी लाने पर जोर दिया। जिले में वर्तमान में 524 कुष्ठ रोगी उपचाररत हैं, जिनके बेहतर उपचार और नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए।
बैठक में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सशक्त बनाने तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की प्रारंभिक पहचान कर सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसे गैर संचारी रोगों के नियंत्रण, सिकल सेल, एनीमिया मुक्त भारत अभियान और चिरायु टीम की सक्रियता बढ़ाने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया गया।
कलेक्टर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण, आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, पोषण पुनर्वास केंद्र, परिवार कल्याण कार्यक्रम, मलेरिया एवं डेंगू नियंत्रण, एनीमिया नियंत्रण सहित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के भी निर्देश दिए।




