
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की सामने आई तस्वीरें उनकी सादगी और सहज व्यक्तित्व की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। तस्वीरों में वे कहीं किसी औपचारिक सरकारी कार्यक्रम में नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के करीब नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में वे स्वयं पौधा रोपते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर पूजा-अर्चना करते नजर आ रहे हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी उनका यह सहज अंदाज लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।पौधरोपण करते हुए बोरा की तस्वीर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देती है। आज पौधरोपण सरकारी अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन जब कोई वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मिट्टी में उतरकर पौधा लगाता है तो उसका संदेश और प्रभाव अलग होता है। यह तस्वीर बताती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी फाइलों और योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।वहीं मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर पूजा-अर्चना करते हुए उनकी दूसरी तस्वीर प्रशासनिक पद की औपचारिकता से बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां न कोई प्रोटोकॉल दिखाई देता है और न ही पद का अहसास, बल्कि एक सामान्य व्यक्ति की तरह सहज होकर धार्मिक आस्था के साथ समय बिताते हुए वे दिखाई दे रहे हैं। यही सहजता उनके व्यक्तित्व को और खास बनाती है।प्रशासनिक व्यवस्था में प्रमुख सचिव का पद बेहद महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला होता है। विभागीय योजनाओं की निगरानी से लेकर नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक व्यवस्था को दिशा देने तक उनकी भूमिका अहम रहती है। ऐसे व्यस्त दायित्वों के बीच प्रकृति के साथ समय बिताना और मंदिर में श्रद्धा के साथ बैठना यह संदेश देता है कि बड़ी जिम्मेदारियों के बावजूद व्यक्ति का जमीन और अपनी जड़ों से जुड़ा रहना जरूरी है।सोनमणि बोरा की ये तस्वीरें इसलिए भी खास हैं क्योंकि इनमें किसी तरह का दिखावा नजर नहीं आता। एक तस्वीर में हाथ मिट्टी से जुड़े हैं तो दूसरी तस्वीर में सिर श्रद्धा से झुका हुआ है। दोनों तस्वीरें मिलकर उनके व्यक्तित्व के दो अलग लेकिन खूबसूरत पहलुओं को सामने रखती हैं—प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संस्कृति के प्रति आस्था।आज के दौर में जब प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान अक्सर सरकारी बैठकों, आदेशों और प्रोटोकॉल से होती है, ऐसे में सोनमणि बोरा की ये सहज तस्वीरें यह संदेश देती हैं कि पद बड़ा हो सकता है, लेकिन इंसान की असली पहचान उसकी सादगी, संवेदनशीलता और जमीन से जुड़े रहने में होती है। पौधा लगाने से लेकर मंदिर की चौखट पर बैठकर पूजा करने तक की यह तस्वीरें निश्चित रूप से प्रशासनिक गलियारों से अलग एक मानवीय और सहज व्यक्तित्व की झलक प्रस्तुत करती हैं।



