
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला पंचायत कार्यालय से सामने आई एक तस्वीर ने शासकीय कार्यालयों में राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के कक्ष में लगे चित्रों के क्रम को लेकर आपत्ति सामने आई है। तस्वीर में एक ओर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका का चित्र दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी ओर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चित्र लगाया गया है।लेकिन सवाल केवल चित्र लगाए जाने का नहीं है, बल्कि उनकी स्थिति और प्रोटोकॉल के अनुसार वरीयता क्रम का है। देश की संवैधानिक व्यवस्था में राष्ट्रपति सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रपति के चित्र की स्थिति और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के चित्रों की प्राथमिकता को लेकर प्रोटोकॉल का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।तस्वीर में दिखाई दे रहे क्रम पर अब सवाल उठ रहा है कि क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के चित्र को अपेक्षित प्रथम और सर्वोच्च स्थान दिया गया है, अथवा राज्यपाल के चित्र को प्राथमिकता देकर प्रोटोकॉल की भावना और निर्धारित वरीयता क्रम की अनदेखी की गई है?यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि संबंधित कार्यालय कोई सामान्य निजी संस्थान नहीं, बल्कि जिला पंचायत का शासकीय कार्यालय है। यहां मुख्य कार्यपालन अधिकारी जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी बैठते हैं और जिले की पंचायत व्यवस्था तथा ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे कार्यालय में राष्ट्रीय प्रतीकों, संवैधानिक पदों और सरकारी प्रोटोकॉल के प्रति पूरी सावधानी अपेक्षित है।स्थानीय प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि चित्रों की व्यवस्था निर्धारित सरकारी प्रोटोकॉल के विपरीत पाई जाती है तो यह केवल सामान्य तकनीकी भूल नहीं, बल्कि राष्ट्रपति पद की संवैधानिक गरिमा और कार्यालयीन व्यवस्था की गंभीर अनदेखी का विषय बन सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिला पंचायत सरगुजा के अधिकारियों ने कार्यालय की इस व्यवस्था को अब तक क्यों नहीं सुधारा?इस मामले में सरगुजा जिला प्रशासन और जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्ट जवाब की अपेक्षा है। प्रशासन को यह बताना चाहिए कि—राष्ट्रपति और राज्यपाल के चित्रों के लिए कौन-सा शासकीय प्रोटोकॉल अपनाया गया?कार्यालय में चित्र किस अधिकारी या विभाग के निर्देश पर लगाए गए?क्या वर्तमान व्यवस्था का प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया गया है?यदि क्रम निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं है तो क्या इसे तत्काल सुधारा जाएगा?इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय में संवैधानिक पदों के सम्मान से जुड़ी व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है?सर्वव्यापी की मांग है कि सरगुजा जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार इस तस्वीर तथा कार्यालयीन व्यवस्था का तत्काल परीक्षण कराएं और यदि प्रोटोकॉल या निर्धारित वरीयता क्रम में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसे बिना विलंब सुधारा जाए।क्योंकि मामला किसी व्यक्ति के चित्र का नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रपति पद की संवैधानिक गरिमा और शासकीय प्रोटोकॉल के सम्मान का है। सरकारी कार्यालयों में छोटी दिखने वाली ऐसी गलतियां भी प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकती हैं।अब सबसे बड़ा सवाल—राष्ट्रपति सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं, तो क्या उनके चित्र को कार्यालय में अपेक्षित सर्वोच्च प्राथमिकता मिली है? यदि नहीं, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?




