
विकास नंद/सर्वव्यापी


छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिकारी-कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर तीन वर्ष की अवधि के बाद स्थानांतरण किए जाने संबंधी निर्देश जारी किए जाने के बाद अब इसके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शासन स्तर पर नीति और निर्देश जारी होने के बावजूद महासमुंद जिले सहित सरायपाली विकासखंड के विभिन्न विभागों में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को लेकर आम लोगों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजस्व, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों में ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि शासन द्वारा जारी तीन वर्ष की अवधि संबंधी आदेश का जिले में किस स्तर तक और कितनी गंभीरता से पालन किया जाता है।
आदेश के बाद बढ़ी लोगों की उम्मीद
सरकार की ओर से अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना माना जा रहा है। लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने वाले कर्मचारियों के स्थानांतरण से प्रशासनिक कार्यों में नई ऊर्जा आने, जवाबदेही बढ़ने और आम जनता को बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद रहती है।इसी वजह से शासन के आदेश के बाद जिले के लोगों में भी उम्मीद जगी है कि तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की विभागवार समीक्षा की जाएगी और नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग में पदस्थापना को लेकर चर्चा
महासमुंद जिले और विशेष रूप से सरायपाली क्षेत्र में राजस्व विभाग आम लोगों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ विभाग है। जमीन संबंधी मामलों, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, प्रमाण पत्र सहित अनेक कार्यों के लिए ग्रामीण और आम नागरिक राजस्व कार्यालयों पर निर्भर रहते हैं।ऐसे में राजस्व विभाग में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।
अब शासन के तीन वर्ष वाले निर्देश के बाद लोगों का सवाल है कि जिन अधिकारी-कर्मचारियों ने निर्धारित अवधि पूरी कर ली है, उनकी पदस्थापना की समीक्षा कब होगी और क्या शासन के निर्देशों के अनुरूप स्थानांतरण किया जाएगा।
इसी तरह सरायपाली में राजस्व विभाग ,जनपद पंचायत, लोक निर्माण , स्वास्थ्य विभाग में भी लंबे समय से पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को लेकर चर्चा है। जनपद पंचायत ग्रामीण विकास योजनाओं और पंचायतों से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं पीडब्ल्यूडी के माध्यम से सड़कों, भवनों और अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े कार्य संचालित होते हैं।
इन विभागों में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर यदि शासन के निर्देशों के अनुसार समीक्षा होती है तो इससे प्रशासनिक कामकाज में बदलाव के साथ नई जवाबदेही तय होने की उम्मीद की जा रही है।
सिर्फ आदेश जारी होने से नहीं, अमल से दिखेगा असर
प्रशासनिक गलियारों में अक्सर यह चर्चा होती है कि शासन स्तर से आदेश तो जारी हो जाते हैं, लेकिन कई बार उनके प्रभावी क्रियान्वयन में देरी हो जाती है। ऐसे में इस बार भी लोगों की नजर इस बात पर है कि तीन वर्ष की अवधि वाले तबादला आदेश का वास्तविक असर जिले में कब दिखाई देता है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की पदस्थापना लंबे समय से एक ही स्थान पर है और वह शासन के निर्धारित मापदंड के अंतर्गत आता है, तो उसकी पदस्थापना की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। इससे यह संदेश भी जाएगा कि शासन के आदेश सभी के लिए समान रूप से लागू हैं।
सुशासन और जीरो टॉलरेंस की नीति की होगी परीक्षा
साय सरकार द्वारा सुशासन और जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अधिकारी-कर्मचारियों की लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना भी प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय बन जाती है।
आम जनता की अपेक्षा है कि शासन के आदेश का पालन केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक विभाग में पदस्थापना की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
अब विभागवार समीक्षा का इंतजार
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि महासमुंद जिले में शासन के तीन वर्ष वाले तबादला निर्देश के आधार पर विभागवार समीक्षा कब शुरू होगी। कौन-कौन से अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित अवधि पूरी कर चुके हैं और उनमें से कितनों का स्थानांतरण किया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
यदि शासन के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्षता से कार्रवाई होती है तो इससे लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों के संबंध में उठ रहे सवालों पर विराम लग सकता है। साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था में भी नई कार्यसंस्कृति और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अब महासमुंद जिले के लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। शासन का आदेश धरातल पर कितना प्रभावी होता है, यह आने वाले दिनों में सामने आएगा।




