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माँ के दूध से नवजीवन का संकल्प: छत्तीसगढ़ में पहले ह्युमन मिल्क बैंक की घोषणा।

विकास नंद/ सर्वव्यापी

विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के तहत रायपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। इस अवसर पर प्रदेश के पहले ‘मातृ दूध कोष (ह्यूमन मिल्क बैंक)’ की स्थापना की घोषणा की गई, जिसे नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) तथा राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एसएचआरसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य स्तनपान के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, शिशुओं को समुचित पोषण उपलब्ध कराना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाना था।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण “माता यशोदा सम्मान” रहा, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 10 माताओं को सम्मानित किया गया।

इन माताओं ने अपने मातृ दुग्ध का दान कर उन नवजात शिशुओं को जीवनदायी सहयोग दिया, जिन्हें किसी कारणवश अपनी माँ का दूध उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस सम्मान के माध्यम से मातृ दुग्ध दान को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित और संपूर्ण आहार है। उन्होंने मितानिन कार्यक्रम के 25 वर्षों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की 72 हजार मितानिन बहनें दूर-दराज़ के क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की निस्वार्थ सेवा कर रही हैं। उन्होंने उनकी तुलना माता शबरी के सेवा और समर्पण भाव से करते हुए कहा कि वे आज की वास्तविक ‘शबरी’ हैं।

मंत्री ने प्रदेश के पहले मातृ दूध कोष (ह्यूमन मिल्क बैंक) को नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायी पहल बताते हुए कहा कि इससे अनेक जरूरतमंद शिशुओं को सुरक्षित मातृ दुग्ध उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि “माँ का दूध पिया है तो आ जा” जैसी कहावत केवल साहस का प्रतीक नहीं, बल्कि माँ के दूध की शक्ति, संस्कार और जीवनदायी महत्व को भी दर्शाती है। उन्होंने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि प्रदेश का कोई भी नवजात माँ के अमूल्य दूध से वंचित न रहे और स्तनपान को जन-आंदोलन बनाया जाए।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने कहा कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान, छह माह तक केवल माँ का दूध तथा माताओं को संतुलित पोषण उपलब्ध कराना स्वस्थ और कुपोषण-मुक्त समाज की मजबूत नींव है। उन्होंने स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और प्रत्येक माँ को आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा ह्यूमन मिल्क बैंक स्टॉल के अवलोकन, दीप प्रज्ज्वलन और वंदे मातरम् के साथ हुई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, एनएचएम, आयुष विश्वविद्यालय, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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