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स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे और रूपकुमारी चौधरी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी से महिला संगठनों की सक्रियता पर चर्चा तेज।

विकास नंद (सर्वव्यापी)

छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों भाजपा महिला मोर्चा की गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी की संगठनात्मक भूमिका है, तो दूसरी ओर भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी का दौरा राजनीतिक हलकों में महिला संगठनों की सक्रियता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।राजनीतिक विश्लेषण के नजरिए से देखें तो भाजपा महिला मोर्चा की गतिविधियों के बीच महिला कांग्रेस की भूमिका और जमीनी सक्रियता पर चर्चा होना स्वाभाविक है। कांग्रेस में महिला विधायक, वरिष्ठ महिला नेत्रियां और महिला संगठन से जुड़ी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बावजूद यदि उनकी गतिविधियां स्थानीय स्तर पर प्रभावी रूप से नजर नहीं आतीं, तो यह संगठन की कार्यशैली, जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं की सक्रियता के आकलन का विषय बन सकता है।

सरायपाली में महिला कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौती?

महासमुंद जिले की सरायपाली विधानसभा सीट भी इस राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। यहां कांग्रेस की महिला विधायक की मौजूदगी के बावजूद भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि महिला कांग्रेस अपनी संगठनात्मक ताकत को जमीनी स्तर पर किस तरह प्रदर्शित कर रही है और महिला मतदाताओं के बीच उसकी सक्रियता कितनी प्रभावी है?हालांकि, किसी संगठन की सक्रियता का आकलन केवल नेताओं के दौरों या सार्वजनिक कार्यक्रमों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों, जनसमस्याओं को उठाने, महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी और जनता से सीधे संवाद जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

महिला राजनीति में संगठनात्मक सक्रियता की अहमियत

स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ दौरा और रूपकुमारी चौधरी की राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी भाजपा महिला मोर्चा की गतिविधियों को राजनीतिक चर्चा में ला रही है। वहीं, महिला कांग्रेस के सामने भी अपनी उपस्थिति को मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर मुखर होने और महिला कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती है।आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों दलों के महिला संगठन महिला सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय जनसमस्याओं जैसे मुद्दों पर किस तरह काम करते हैं। अंततः किसी भी संगठन की वास्तविक ताकत उसके पदाधिकारियों की संख्या से अधिक उसके जमीनी काम, जनसंपर्क और जनता के बीच उसकी निरंतर सक्रियता से तय होती है।

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