
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के माटी म तिहार-बार के अपन अलग महत्तम हे। इहां के तिहार मन केवल पूजा-पाठ अउ रीति-रिवाज तक नइ सिमटे हवंय, बल्कि मनखे मन के जिनगी, आपसी मया, भाईचारा, सामाजिक एकता अउ पुरखा मन के संस्कार ले घलो जुड़े हवंय। अइसने पावन तिहार म दसहरा के अपन अलग महत्तम हे। दसहरा हमर संस्कृति, आस्था अउ लोकपरंपरा के अइसन परब आय, जेन ह हमन ल सत्य के रद्दा म चले, अधरम ले बांचे अउ अपन भीतर के बुराई मन ल दूर करे के सीख देवथे।दसहरा के नांव आवत ही भगवान श्रीराम के अधरम के ऊपर धरम के विजय अउ रावण के ऊपर श्रीराम के विजय के गोठ मन म आथे। फेर दसहरा के असली संदेस सिरिफ रावण के पुतला ल जराना नइ हे, बल्कि मनखे के भीतर बसे घमंड, लोभ, लालच, छल-कपट, अन्याय अउ अहंकार ल खतम करना घलो हे। जब तक मनखे के मन म दूसर मन बर नफरत, समाज म भेदभाव अउ व्यवहार म अन्याय रहिही, तब तक दसहरा के असली उदेस पूरा नइ हो सकय।छत्तीसगढ़ के संस्कृति म दसहरा के महत्तम केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित नइ हे। इहां के अलग-अलग इलाका म दसहरा ल अपन-अपन रीति, परंपरा अउ लोकमान्यता के संग मनाय जाथे। कहीं देवी दंतेश्वरी के आराधना के संग बस्तर दसहरा के भव्य परंपरा देखे ल मिलथे, त कहीं देवी मंदिर मन म पूजा-पाठ, गांव-गांव म जसगीत, सेवा-जवारा अउ धार्मिक आयोजन होथे।बस्तर के दसहरा त अपन अनोखा परंपरा अउ लोकआस्था बर पूरा दुनिया म जाने जाथे। इहां के दसहरा भगवान श्रीराम के रावण वध के परंपरा ले अलग, देवी दंतेश्वरी के आराधना अउ आदिवासी समाज के सदियों पुराना रीति-रिवाज के संग जुड़े हवय। ए परब ह छत्तीसगढ़ के जनजातीय संस्कृति, सामूहिक भागीदारी अउ लोकविश्वास के अनमोल धरोहर आय।बस्तर के दसहरा हमन ल बताथे कि हमर प्रदेश के सांस्कृतिक पहचान कतका समृद्ध अउ विविधतापूर्ण हे। इहां के हर अंचल के अपन बोली, अपन परंपरा, अपन देवता अउ अपन लोकमान्यता हे। ए विविधता हमर कमजोरी नइ, बल्कि हमर सबसे बड़े सांस्कृतिक ताकत आय।भगवान श्रीराम के जीवन ह मर्यादा, त्याग, कर्तव्य अउ न्याय के प्रतीक आय। रावण के चरित्र ह ए बात के चेतावनी देवथे कि ज्ञान, शक्ति अउ वैभव रहिथे तभो ले अगर मन म अहंकार आ जाथे, त मनखे के पतन निश्चित हो जाथे।आज के समय म दसहरा के ए संदेस अउ घलो जरूरी हो गे हे। समाज म बढ़त स्वार्थ, छल-कपट, भ्रष्टाचार, नशाखोरी, महिला मन के ऊपर अत्याचार अउ गरीब-असहाय मन के संग होवत अन्याय हमर समाज बर गंभीर चिंता के विषय आय। अइसन बुराई मन के खिलाफ केवल भाषण देय ले काम नइ चलय। जरूरत हे कि हर मनखे अपन आचरण म सुधार लावय अउ समाज के प्रति अपन जिम्मेदारी ल समझय।अगर कोनो अधिकारी अपन पद के दुरुपयोग नइ करय, कोनो व्यापारी मनखे के संग धोखाधड़ी नइ करय, कोनो जनप्रतिनिधि जनता के भरोसा ल नइ तोड़य अउ हर नागरिक दूसर के अधिकार के सम्मान करय, त समाज म सच्चा रामराज के सपना साकार हो सकथे।एखर सेती दसहरा के दिन हमन ल अपन मन के भीतर झांक के देखे के जरूरत हे कि हमन कतका सच के संग खड़े हवन अउ कतका गलत बात मन के विरोध करे के हिम्मत रखथन।छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म तिहार-बार मनखे मन ल एक-दूसर के नजदीक लाथे। दसहरा के अवसर म परिवार के मनखे एके जगा जम्मो होथें, नवा कपड़ा पहिरथें, बड़े-बुजुर्ग मन के आशीर्वाद लेथें अउ एक-दूसर के सुख-समृद्धि के कामना करथें।हमर छत्तीसगढ़ म आपसी मया, मिल-जुल के रहे के भावना अउ सुख-दुख म साथ देय के परंपरा सदियों ले चलत आवत हे। ए परंपरा ल बचाके रखना आज के समय के सबसे बड़े जरूरत आय। जाति, धरम, भाषा अउ वर्ग के नांव म समाज ल बांटे के बजाय हमन ल आपसी सद्भाव अउ भाईचारा ल मजबूत करना चाही।दसहरा के तिहार हमन ल सिखाथे कि समाज के असली ताकत एकता म बसे हे। जब समाज के मनखे मन एक-दूसर के सम्मान करथें, गरीब अउ कमजोर मन के सहारा बनथें अउ मिल-जुल के रहिथें, त समाज म सुख, शांति अउ समृद्धि के रद्दा खुलथे।छत्तीसगढ़ के पहिचान इहां के माटी, जंगल, नदिया, लोकगीत, लोकनृत्य, तीज-तिहार अउ छत्तीसगढ़ी भाखा ले बनथे। हमर पुरखा मन ह अपन परंपरा अउ संस्कार ल पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाय हवंय। अब ए धरोहर ल बचाके रखे के जिम्मेदारी हमर ऊपर हे।दसहरा जइसन तिहार मन के अवसर म हमन ल अपन लइका मन ल छत्तीसगढ़ के लोकपरंपरा, लोककथा अउ सांस्कृतिक विरासत के बारे म बताना चाही। घर-परिवार म छत्तीसगढ़ी म गोठियाना, लोकगीत मन ल गाना अउ अपन तीज-तिहार के परंपरा ल सम्मान देना हमर संस्कृति ल मजबूत करही।जेन समाज अपन भाखा अउ संस्कृति ल भुला देथे, ओ समाज धीरे-धीरे अपन पहिचान ले दूर हो जाथे। एखर सेती छत्तीसगढ़ी भाखा के मान-सम्मान बढ़ाना अउ आने वाली पीढ़ी तक एला पहुंचाना हम सबके साझा जिम्मेदारी आय।नवा पीढ़ी बर दसहरा के सीखआज के युवा पीढ़ी देश अउ प्रदेश के भविष्य आय। दसहरा के अवसर म युवा मन ल ए संकल्प लेना चाही कि ओमन बुराई, नशा, हिंसा अउ गलत संगत ले दूर रहिहीं। शिक्षा, मेहनत, ईमानदारी अउ समाजसेवा ल अपन जिनगी के आधार बनाहीं।केवल तिहार मनाय ले समाज म बदलाव नइ आ सकय। बदलाव तब आही, जब हर नागरिक अपन कर्तव्य ल समझही अउ दूसर के पीरा ल अपन पीरा समझही। जरूरतमंद मन के मदद करना, बेटा-बेटी म भेदभाव नइ करना, महिला मन के सम्मान करना अउ पर्यावरण के रक्षा करना घलो दसहरा के पावन संदेस के हिस्सा आय।हमन ल अइसन समाज बनाय के सपना देखना चाही, जिहां कोनो गरीब भूख के मारे नइ सुतय, कोनो बेटी अपन आप ल असुरक्षित महसूस नइ करय अउ कोनो कमजोर मनखे के संग अन्याय नइ होवय।दसहरा के दिन जगह-जगह रावण के पुतला जराय जाथे। ए परंपरा ह अधरम के ऊपर धरम अउ बुराई के ऊपर अच्छाई के जीत के प्रतीक आय। फेर आज जरूरत ए बात के हे कि पुतला दहन के संग-संग हमन अपन भीतर के बुराई मन के घलो अंत करे के संकल्प लेवन।घमंड के रावण, लालच के रावण, भ्रष्टाचार के रावण, नशा के रावण, भेदभाव के रावण अउ अन्याय के रावण ल जब तक हमन अपन मन ले नइ जराबो, तब तक समाज म सच्चा बदलाव लाना कठिन हे।आवव, ए दसहरा म हमन संकल्प लेवन कि सच बोलबो, दूसर के सम्मान करबो, अन्याय के विरोध करबो, जरूरतमंद मन के मदद करबो अउ अपन छत्तीसगढ़ के भाखा, संस्कृति अउ परंपरा के मान बढ़ाबो।दसहरा के असली जीत ओ दिन होही, जब मनखे के मन ले बुराई मिटही, समाज म सद्भाव बढ़ही अउ हर घर म सुख, शांति अउ खुशहाली के दीया जरही।जय जोहार! जय छत्तीसगढ़!




