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120 करोड़ की खैर लकड़ी तस्करी का अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर, दो आरोपी गिरफ्तार।

विकास नंद/सर्वव्यापी

खैर लकड़ी की तस्करी से जुड़े संगठित अंतरराज्यीय गिरोह पर महासमुंद पुलिस ने शिकंजा कसते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की तकनीकी विवेचना में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के सिंडीकेट द्वारा पिछले दो वर्षों में उड़ीसा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की अवैध तस्करी किए जाने के प्रमाण मिले हैं।

पुलिस के अनुसार, अवैध कारोबार को कागजों में वैध दर्शाने के लिए गिरोह द्वारा 8 शेल कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉयसिंग तैयार की जाती थी। वहीं अवैध कारोबार से प्राप्त रकम के लेनदेन, भुगतान और लेयरिंग के लिए 10 से अधिक म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी विवेचना में सामने आई है।यह मामला वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन पर खैर लकड़ी के अवैध परिवहन से जुड़ा है। कुल 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना कर उसका वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग करने और शासन को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाने के आरोप में थाना पिथौरा में अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट तथा भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

7 सितंबर को मुख्य आरोपी के ठिकाने से मिले थे 81 लाख रुपये

विवेचना के दौरान महासमुंद पुलिस ने गत 7 सितंबर को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने की तलाशी लेकर 81 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इसके बाद तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस के सामने खैर लकड़ी तस्करी का एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क सामने आया।पुलिस का दावा है कि मनीष अग्रवाल और उसके सहयोगियों ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उड़ीसा से हिमाचल प्रदेश तक खैर लकड़ी के अवैध कारोबार को संचालित किया। फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों के जरिए इस कारोबार को वैध स्वरूप देने का प्रयास किया जाता था।

फर्जी कंपनियों से नेटवर्क चलाने वाले दो गिरफ्तार

तकनीकी जांच से मिले पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर महासमुंद पुलिस ने उड़ीसा से फर्जी कंपनियों का संचालन करने और नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने के आरोप में दो आरोपियों को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।गिरफ्तार आरोपियों में पारितोष मिश्रा (47), पिता सुरेंद्र मिश्रा, संचालक पीयूष इंटरप्राइजेज, निवासी रफाजाल, सालेभाटा, बोलांगीर, उड़ीसा तथा अखिलेश सिंघल (52), पिता स्व. चंद्रप्रकाश सिंघल, संचालक सिंघल इंटरप्राइजेज, संबलपुर, निवासी संबलपुर, उड़ीसा शामिल हैं।

अवैध संपत्तियों की कुर्की-राजसात की तैयारी

महासमुंद पुलिस के अनुसार मामले में वित्तीय ट्रेल की गहन जांच की जा रही है। पुलिस अन्य सह-आरोपियों की तलाश के साथ-साथ अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान में जुटी है। महासमुंद पुलिस, वन विभाग और वित्तीय एजेंसियों के समन्वय से अवैध संपत्तियों की कुर्की एवं राजसात की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।पुलिस का कहना है कि वनोपज के अवैध परिवहन, धोखाधड़ी और संगठित आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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