
विकास नंद/ सर्वव्यापी
शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में डिप्टी सीएम अरुण साव द्वारा विकास कार्यों की शुरुआत के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन सरायपाली विकासखंड के अनेक गांवों में आज भी ग्रामीण नियमित पेयजल आपूर्ति की बाट जोह रहे हैं।जानकारी के अनुसार सरायपाली विकासखंड में जल जीवन मिशन के तहत 200 से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें विभिन्न गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण, पाइपलाइन विस्तार तथा घरों तक नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना थी। लेकिन लगभग पांच वर्ष बीतने और सरकार बदलने के बाद भी बड़ी संख्या में कार्य अपेक्षित रूप से धरातल पर नहीं उतर सके हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 50 गांवों में ही मुश्किल से नियमित पेयजल आपूर्ति हो पा रही है।
पानी की तरह पैसा बहा, फिर भी नहीं बुझी गांवों की प्यास
जल जीवन मिशन के तहत बड़े पैमाने पर राशि खर्च किए जाने के बावजूद यदि ग्रामीणों को नियमित पानी नहीं मिल रहा है तो योजना की कार्यप्रणाली, निर्माण की गुणवत्ता, पाइपलाइन बिछाने, टंकियों की उपयोगिता और ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कई स्थानों पर अधूरे निर्माण और तकनीकी खामियों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।सरकार लगातार सुशासन, पारदर्शिता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का दावा कर रही है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से लंबित जल जीवन मिशन के कार्यों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है।
जिम्मेदारी तय होगी या फाइलों में ही रहेगा हिसाब?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्वीकृत कार्यों के बावजूद गांवों तक पानी नहीं पहुंचा तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या निर्माण एजेंसियों और संबंधित ठेकेदारों के कार्यों का गुणवत्ता परीक्षण हुआ? क्या अधूरे अथवा अनुपयोगी कार्यों पर भुगतान की जांच की गई? और यदि कहीं सरकारी राशि का दुरुपयोग या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों से वसूली की कार्रवाई कब होगी?शहर की प्यास बुझाने की दिशा में डिप्टी सीएम अरुण साव की पहल के बीच अब सरायपाली के ग्रामीण भी यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल जीवन मिशन की लंबित योजनाओं को गति मिलेगी और सरकारी धन खर्च होने के साथ-साथ उसका वास्तविक लाभ भी ग्रामीण परिवारों तक पहुंचेगा।ग्रामीणों का कहना है कि टंकी और पाइपलाइन निर्माण को ही योजना की सफलता नहीं माना जा सकता, जब तक नल से नियमित और पर्याप्त पानी न पहुंचे। ऐसे में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत सभी कार्यों की स्वतंत्र जांच, भौतिक सत्यापन और गांववार पेयजल आपूर्ति की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग जोर पकड़ रही है।




