
विकास नंद/ सर्वव्यापी
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज नया रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी का श्रवण किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जनभागीदारी, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न प्रेरणादायी प्रयासों पर अपने विचार साझा किए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सितंबर माह कुपोषण के खिलाफ जागरूकता और पोषण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में लोगों को पौष्टिक मुनगा यानी मोरिंगा को अपने खान-पान में शामिल करने के लिए प्रेरित करने की पहल की जा रही है।मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ जैसे सशक्त माध्यम से छत्तीसगढ़ की ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ पहल का उल्लेख किया जाना प्रदेशवासियों के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। यह छत्तीसगढ़ की सकारात्मक सोच, जनभागीदारी और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पोषण को बढ़ावा देने के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अवसर है।उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ देशभर में हो रहे जनहितकारी और प्रेरणादायी प्रयासों को लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा किए जा रहे सकारात्मक कार्यों को व्यापक पहचान मिलती है और अन्य लोगों को भी ऐसे प्रयासों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुनगा पोषण की दृष्टि से उपयोगी स्थानीय संसाधन है। ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान के माध्यम से इसे लोगों के दैनिक खान-पान का हिस्सा बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस पहल का उल्लेख प्रदेश में पोषण के प्रति जनजागरूकता और जनभागीदारी को नई गति देगा।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत से ही नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी सकारात्मक पहलों से भी बन रही है। ‘मन की बात’ में इन प्रयासों की चर्चा होना प्रदेश की जमीनी पहलों को देश के व्यापक मंच से जोड़ने का अवसर है।मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आने वाली प्रेरणादायी कहानियां यह संदेश देती हैं कि जनभागीदारी से छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में समाज की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने प्रदेशवासियों से स्थानीय स्तर पर होने वाली जनहितकारी पहलों से जुड़ने तथा जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता महत्वपूर्ण है।




