
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर से बेलगहना होते हुए गौरेला जाने वाले राष्ट्रीय मार्ग पर भंवरटंक के समीप देर रात एक तेंदुआ दिखाई देने से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। रात लगभग 11:30 बजे सड़क से गुजर रहे एक वाहन सवार ने सड़क किनारे बैठे तेंदुए को देखा और उसका वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो अब क्षेत्र में तेजी से वायरल हो रहा है तथा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।जानकारी के अनुसार, वाहन में सवार सत्यम दीक्षित के जीजा जब भंवरटंक के घने जंगल वाले क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर सड़क किनारे बैठे एक तेंदुए पर पड़ी। तेंदुआ कुछ देर तक शांत मुद्रा में सड़क के किनारे बैठा रहा। वाहन की रोशनी और हलचल महसूस होने के बाद वह अचानक उठा और तेज गति से दौड़ते हुए सड़क के नीचे जंगल की ओर चला गया। पूरी घटना वाहन में बैठे व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली।
भंवरटंक का इलाका घने जंगलों और वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। यह मार्ग रात के समय अपेक्षाकृत सुनसान रहता है, जिससे वन्यजीव अक्सर सड़क के आसपास दिखाई देते हैं। हालांकि इस बार तेंदुए का सड़क किनारे इतने नजदीक दिखाई देना राहगीरों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
घटना के बाद क्षेत्र से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। विशेषकर रात के समय यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल तेंदुए द्वारा किसी व्यक्ति पर हमले अथवा किसी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना नहीं है, लेकिन वन्यजीव की मौजूदगी को देखते हुए लोगों में स्वाभाविक रूप से भय का माहौल है।
वन विभाग को भी इस घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय अमला जंगल और सड़क किनारे के हिस्सों पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि रात्रि के समय अनावश्यक रूप से जंगल क्षेत्र में वाहन न रोकें, वाहन से बाहर न निकलें तथा यदि किसी वन्यजीव का सामना हो तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में भोजन और आवागमन के दौरान तेंदुए सहित अन्य वन्यजीव कभी-कभी सड़क के आसपास भी दिखाई दे जाते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को तेज गति से वाहन चलाने के बजाय सावधानीपूर्वक यात्रा करनी चाहिए, ताकि वन्यजीवों और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।




