
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक ने पूरी प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। विभागीय स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकों का दौर जारी है और स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि अब अधूरे कार्य, धीमी प्रगति और लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।सूत्रों के अनुसार, विभाग ने कार्यदायी एजेंसियों और ठेकेदारों को साफ़ शब्दों में निर्देश दिया है कि जिन परियोजनाओं के लिए अग्रिम भुगतान या निर्धारित राशि का बड़ा हिस्सा जारी किया जा चुका है, उनका कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए। दावा किया जा रहा है कि अनेक कार्यों में ठेकेदारों को लगभग 50 प्रतिशत राशि पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। ऐसे में अब विभाग का जोर इस बात पर है कि कार्यों को धरातल पर पूरी गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। (इस 50% भुगतान संबंधी दावे की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।)बताया जा रहा है कि सचिव अब्दुल कैसर हक ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक परियोजना की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी दिखाई दे, वहां तत्काल जवाबदेही तय की जाए। विभाग की प्राथमिकता अब केवल स्वीकृतियां और भुगतान नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है।सूत्रों का कहना है कि विभाग ने यह भी स्पष्ट संकेत दिया है कि जिन ठेकेदारों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहेगा या जो कार्यों में लापरवाही बरतेंगे, उन्हें भविष्य में विभागीय कार्य आवंटित करने पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाएगा। इससे निर्माण एजेंसियों में भी जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।इधर, केवल पाइपलाइन और टंकियों के निर्माण तक सीमित न रहकर विभाग जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। जानकारी के अनुसार, सचिव अब्दुल कैसर हक भूजल संरक्षण, स्थानीय जल स्रोतों के विकास, वर्षा जल संचयन तथा जल संरचनाओं को सुदृढ़ करने जैसी योजनाओं पर भी विशेष रणनीति तैयार कर रहे हैं, ताकि भविष्य में पेयजल योजनाएं जल संकट का सामना न करें।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल स्रोतों के संरक्षण और योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर समान रूप से ध्यान दिया गया तो जल जीवन मिशन के स्थायी परिणाम सामने आ सकते हैं। यही कारण है कि विभाग अब केवल निर्माण कार्यों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थायित्व को भी प्राथमिकता दे रहा है।आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग की सख्त कार्यशैली और नियमित मॉनिटरिंग का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है। यदि अधूरे कार्य समय पर पूरे होते हैं और जल स्रोतों के संरक्षण की योजनाएं सफल होती हैं, तो प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य और अधिक मजबूती से हासिल किया जा सकेगा।यदि चाहें तो इसे और अधिक खोजी, राजनीतिक या संपादकीय शैली में भी रूपांतरित किया जा सकता है।



