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बेहतर कार्यशैली और साफ सेवा रिकॉर्ड से अलग पहचान बना रहे डॉ. मिश्रा।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग, कोरबा में डॉ. एस. एन. मिश्रा की कार्यशैली इन दिनों चर्चा में है। विभागीय जिम्मेदारियों के निर्वहन में सक्रियता, बेहतर समन्वय और कार्यों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। खास बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार डॉ. मिश्रा के विरुद्ध अब तक किसी प्रकार का गंभीर आरोप सामने नहीं आया है, जो उनके सेवा रिकॉर्ड को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य है।विभागीय स्तर पर अधिकारी की कार्यक्षमता का आकलन केवल पद और अधिकारों से नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए जा रहे कार्यों के परिणाम से होता है। इसी दृष्टि से डॉ. एस. एन. मिश्रा की कार्यशैली को देखने पर उनके पक्ष में कई सकारात्मक पहलू सामने आते हैं। विभागीय दायित्वों को गंभीरता से निभाना, अधीनस्थ अमले के साथ समन्वय बनाए रखना और पशु चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देना उनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा बताया जाता है।पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं का सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा पशुपालकों की आजीविका से है। ऐसे विभाग में अधिकारी की सक्रियता का असर सीधे मैदानी स्तर पर दिखाई देता है। यही वजह है कि विभागीय कार्यों को गति देने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दृष्टि से अधिकारियों की कार्यशैली का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है।डॉ. मिश्रा के मामले में यह भी उल्लेखनीय है कि उनके विरुद्ध अब तक किसी प्रकार का आरोप नहीं होने की स्थिति में उनके कार्यों का मूल्यांकन नकारात्मक धारणाओं के बजाय वास्तविक उपलब्धियों और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए। किसी अधिकारी की वर्षों की कार्यशैली और सेवा रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर केवल किसी वर्तमान चर्चा के आधार पर धारणा बनाना उचित नहीं होगा।जरूरत इस बात की है कि पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग, कोरबा में किए जा रहे सकारात्मक कार्यों को भी सामने लाया जाए। यदि किसी अधिकारी ने अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया है और विभागीय कार्यों को बेहतर बनाने में योगदान दिया है, तो उसकी निष्पक्ष समीक्षा के साथ उन उपलब्धियों की चर्चा भी सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए।डॉ. एस. एन. मिश्रा का मामला इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए—आरोपों की तलाश के बजाय उनके काम, उपलब्धियों और सेवा रिकॉर्ड को आधार बनाकर। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ना न केवल संबंधित अधिकारी के लिए, बल्कि पूरे विभागीय तंत्र और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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