
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर सोशल मीडिया के रास्ते चर्चा के केंद्र में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया गया है कि जिस पार्टी ने प्रदेश में शराबबंदी का वादा किया था, उसके महिला संगठन से जुड़े एक कार्यक्रम में कथित तौर पर शराब के गीतों पर महिलाओं के नृत्य का वीडियो सामने आना आखिर किस ओर इशारा करता है। यह पोस्ट ‘Bjp Chhattisgarh’ नामक फेसबुक पेज से प्रसारित दिखाई दे रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।वायरल स्क्रीनशॉट में ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा गया है— “शराबबंदी का वादा करने वाली कांग्रेस आज शराब के गानों पर झूम रही है”। पोस्ट में आगे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मातृशक्ति के कथित अपमान का आरोप लगाते हुए महिला कांग्रेस को निशाने पर लिया गया है। पोस्ट के साथ साझा तस्वीर में बड़ी संख्या में महिलाएं एक सभागार में बैठी दिखाई दे रही हैं, जबकि सामने कुछ महिलाएं नृत्य करती नजर आ रही हैं। हालांकि, केवल इस वायरल तस्वीर के आधार पर कार्यक्रम का स्थान, तारीख, आयोजनकर्ता, गीत अथवा उसमें शामिल महिलाओं की राजनीतिक पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।यही वजह है कि वायरल पोस्ट अब महज एक सोशल मीडिया सामग्री नहीं रह गई है, बल्कि इसके बहाने छत्तीसगढ़ की राजनीति में वादे, शराब नीति, महिला संगठनों की भूमिका और राजनीतिक दलों के दोहरे मापदंड को लेकर बहस तेज होने लगी है। भाजपा समर्थित सोशल मीडिया पोस्ट इसे कांग्रेस के कथित दोहरे चरित्र से जोड़ रहा है, वहीं इस तरह की सामग्री की वास्तविकता और पूरे संदर्भ को सामने रखना भी उतना ही जरूरी है।छत्तीसगढ़ की राजनीति में शराबबंदी का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। चुनावी राजनीति में शराबबंदी का वादा मतदाताओं के बीच हमेशा प्रभावशाली मुद्दा रहा है। ऐसे में विपक्षी दल जब शराब या शराब से जुड़े किसी दृश्य को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं तो उसका सीधा असर राजनीतिक विमर्श पर पड़ता है। वायरल पोस्ट भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है, जिसमें कांग्रेस के पुराने वादे को मौजूदा दृश्य के साथ जोड़कर सवाल खड़ा किया गया है।क्या सिर्फ गीत पर नृत्य से वादे की विश्वसनीयता तय होगी?यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी कार्यक्रम में शराब से संबंधित गीत बजना या उस पर नृत्य होना क्या स्वतः ही शराब के समर्थन के रूप में देखा जा सकता है? राजनीति में इस सवाल का जवाब सीधे-सीधे देना आसान नहीं है। किसी कार्यक्रम के पूरे वीडियो, आयोजन का उद्देश्य, गीत की प्रकृति और आयोजकों की भूमिका सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।लेकिन राजनीतिक दृष्टि से भाजपा के लिए यह पोस्ट कांग्रेस को घेरने का एक प्रभावी अवसर जरूर बनाता है। यदि कांग्रेस ने प्रदेश में शराबबंदी को लेकर राजनीतिक वादा किया है, तो भाजपा स्वाभाविक रूप से ऐसे किसी भी दृश्य को उसके विरोधाभासी आचरण के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह जरूरी होगा कि वह वायरल सामग्री पर अपना स्पष्ट पक्ष रखे और बताए कि कार्यक्रम वास्तव में किस उद्देश्य से आयोजित किया गया था।‘मातृशक्ति और संस्कृति’ के नाम पर भी राजनीति?वायरल पोस्ट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मातृशक्ति से जुड़ा हुआ है। भाजपा के पोस्ट में महिला कांग्रेस पर प्रदेश की संस्कृति और मातृशक्ति का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में लोकसंस्कृति, तीज-त्योहार, पारंपरिक नृत्य और महिला सहभागिता का अपना अलग महत्व है।ऐसे में सवाल केवल यह नहीं रह जाता कि कार्यक्रम में क्या हुआ, बल्कि यह भी बनता है कि राजनीतिक दल अपने सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किस तरह के संदेश जनता तक पहुंचाना चाहते हैं। यदि कोई संगठन संस्कृति के नाम पर कार्यक्रम करता है तो उसकी गतिविधियों को लेकर सार्वजनिक चर्चा होना स्वाभाविक है। लेकिन सोशल मीडिया के दौर में आधे-अधूरे वीडियो अथवा तस्वीरें भी राजनीतिक नैरेटिव बनाने का माध्यम बन सकती हैं।वायरल पोस्ट ने कांग्रेस के लिए खड़ा किया असहज सवालफिलहाल इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि वायरल पोस्ट में लगाए गए आरोपों पर संबंधित कांग्रेस संगठन या कार्यक्रम के आयोजकों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आए तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। यदि यह कार्यक्रम वास्तव में महिला कांग्रेस का था, तो आयोजन की परिस्थितियों और वीडियो के संदर्भ पर कांग्रेस का पक्ष जानना जरूरी होगा। वहीं यदि वायरल पोस्ट में कार्यक्रम की पहचान या संदर्भ गलत प्रस्तुत किया गया है, तो संबंधित पक्ष को तथ्यों के साथ उसका खंडन करना चाहिए।सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के बीच चल रही इस तरह की तस्वीरों और वीडियो की जंग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति में मुद्दों की गंभीरता अब सोशल मीडिया पोस्ट और वायरल वीडियो के भरोसे तय होने लगी है?शराबबंदी का वादा बनाम राजनीतिक आरोपों की राजनीतिछत्तीसगढ़ में शराबबंदी का मुद्दा केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बहस से भी जुड़ा विषय है। शराब से होने वाले पारिवारिक और सामाजिक नुकसान, सरकारी राजस्व, अवैध शराब और नशामुक्ति जैसे कई पहलू इसके साथ जुड़े हैं। इसलिए शराबबंदी जैसे गंभीर मुद्दे को केवल किसी वायरल वीडियो या राजनीतिक पोस्ट तक सीमित कर देना भी उचित नहीं होगा।फिर भी, राजनीतिक दलों द्वारा किए गए वादों और उनके सार्वजनिक आचरण के बीच सामंजस्य लोकतंत्र में महत्वपूर्ण सवाल है। भाजपा के वायरल पोस्ट ने इसी बिंदु को उछालते हुए कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस इस पोस्ट का क्या जवाब देती है और क्या वह वायरल तस्वीर के पीछे की पूरी कहानी जनता के सामने रखती है।फिलहाल इतना जरूर है कि एक तस्वीर ने शराबबंदी से लेकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति तक कई सवालों को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। वायरल सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि और पूरे वीडियो का संदर्भ सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि मामला वास्तव में क्या है—सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामान्य मनोरंजन या फिर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया एक और सोशल मीडिया हथियार।




