
विकास नंद/सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की तैयारियों के बीच राज्य सरकार ने गिरदावरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और जवाबदेह बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को शत-प्रतिशत डिजिटल एवं मैन्युअल गिरदावरी सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।सरकार का उद्देश्य समर्थन मूल्य पर धान, मक्का तथा प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर की खरीदी के लिए वास्तविक फसल रकबे का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना है। इसके लिए पूरे प्रदेश में गिरदावरी प्रक्रिया की निगरानी को सात स्तरों पर मजबूत किया गया है।नई व्यवस्था के अनुसार पटवारी अपने हल्के के 100 प्रतिशत रकबे का सत्यापन करेंगे। राजस्व निरीक्षक एवं कृषि विस्तार अधिकारी 25-25 प्रतिशत, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार 10 प्रतिशत तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) 5 प्रतिशत रकबे का सत्यापन करेंगे। वहीं जिला स्तरीय अधिकारी 1 प्रतिशत और राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारी 0.1 प्रतिशत रकबे का औचक निरीक्षण करेंगे, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
राज्य शासन ने गिरदावरी कार्य के लिए समय-सीमा भी तय कर दी है। 20 सितंबर 2026 तक गिरदावरी, खसरा एवं भुईयां सॉफ्टवेयर में प्रविष्टि तथा त्रुटि सुधार का कार्य पूरा किया जाएगा। इसके बाद 25 सितंबर को ग्रामवार फसल क्षेत्राच्छादन प्रतिवेदन का प्रारंभिक प्रकाशन होगा। प्राप्त दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद 30 सितंबर 2026 तक अंतिम संशोधन कर रिकॉर्ड अपडेट कर दिए जाएंगे।
फसल बदली तो फोटो अपलोड करना होगा अनिवार्य
यदि किसी किसान ने धान के स्थान पर अन्य फसल बोई है अथवा खेत खाली छोड़ा है, तो संबंधित पटवारी और राजस्व निरीक्षक को खसरावार खेत का मोबाइल से फोटो लेकर अपलोड करना अनिवार्य होगा। यदि राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक फसल में अंतर पाया गया तो संबंधित मैदानी अमले के साथ-साथ पर्यवेक्षण अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।
गांव-गांव मुनादी, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होगी गिरदावरी
गिरदावरी की तिथियों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए कोटवारों के माध्यम से गांव-गांव मुनादी कराई जाएगी।
गिरदावरी के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उपस्थित रहने का अवसर मिलेगा और किसान भी मौके पर उपस्थित होकर अपना फोटो दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक प्रत्येक 15 दिन में गिरदावरी कार्य की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गिरदावरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनेगी, जिससे समर्थन मूल्य पर खरीदी में फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगेगा और वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।




