
नूर मोहम्मद ,जिला ब्यूरो चीफ ,गौरेला पेंड्रा मरवाही(सर्वव्यापी)

लबों पर दरूद-ओ-सलाम, दिलों में नबी-ए-करीम की मोहब्बत और चारों ओरअमन-ओ-भाईचारे का पैगाम…। जश्ने ईद मिलादुन्नबी के 1501वें वर्ष के मुबारक अवसर पर जीपीएम जिले में ऐसा ही रूहानी और खुशनुमा माहौल देखने को मिला। मुस्लिम समाज ने पूरे अकीदत, एहतराम और शानो-शौकत के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालकर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद की यौमे विलादत की खुशी मनाई। टीकरकला से शुरू हुआ यह जुलूस जब गौरेला की सड़कों पर पहुंचा तो विभिन्न स्थानों से आए जुलूसों के एक साथ शामिल होने से एक विशाल कारवां में तब्दील हो गया। हजारों की तादाद में अकीदतमंदों की मौजूदगी ने पूरे शहर को दरूद-ओ-सलाम की सदाओं से गूंजा।
टीकरकला से उठा कारवां, गौरेला में बना विशाल जुलूस
जुलूस-ए-मोहम्मदी की शुरुआत टीकरकला स्थित हुसैनी मस्जिद के प्रांगण से हुई। यहां मुख्तसर तकरीर एवं सलातो-सलाम के बाद जुलूस रवाना हुआ। अकीदतमंदों का कारवां टीकरकला बस्ती का गश्त करते हुए खानकाह-ए-जहांगीरी पहुंचा। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया तथा मिठाई, खीर और पानी तक्सीम किया।इसके बाद जुलूस मासूम गली का गश्त करते हुए अंबेडकर नगर के रास्ते गौरेला पहुंचा। इसी दौरान गोरखपुर और दीपूपारा से निकला जुलूस भी गौरेला पहुंचा और मुख्य जुलूस में शामिल हो गया। दोनों जुलूसों के एक साथ मिलने के बाद नजारा और भी भव्य हो गया तथा हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में यह एक विशाल जुलूस का रूप ले गया।
शहर की गलियों से गुजरा मोहब्बत का कारवां
विशाल जुलूस-ए-मोहम्मदी गौरेला शहर का गश्त करते हुए मंगली बाजार, स्टेशन रोड और संजय चौक से आगे बढ़ा। जुलूस के रास्ते में जगह-जगह लोगों ने अकीदतमंदों का इस्तकबाल किया। कई स्थानों पर फल, मिठाई, खीर, शरबत और ठंडे पानी का वितरण किया गया।जुलूस में शामिल लोगों ने अदब और अनुशासन का विशेष ध्यान रखते हुए आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। पूरे मार्ग में धार्मिक आस्था के साथ-साथ इंसानियत और सद्भाव का संदेश भी दिखाई दिया।
तहसील मोहल्ले में हुआ गर्मजोशी से इस्तकबाल
जुलूस जब तहसील मोहल्ले के पास पहुंचा तो वहां लोगों ने जुलूस का शानदार और गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। स्वागत स्थल पर अकीदतमंदों के लिए पानी, खीर और मिठाई का इंतजाम किया गया। लोगों ने एक-दूसरे को जश्ने ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद पेश की।इस दौरान पूरे वातावरण में उत्साह के साथ आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना नजर आई।
“हजरत मुहम्मद पूरी कायनात के लिए रहमत बनकर आए”
कार्यक्रम में वक्ता फजल नूरी साहब ने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद की यौमे विलादत के मुबारक मौके पर देश, प्रदेश और जिलेवासियों को मुबारकबाद पेश की। उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम की जिंदगी और उनकी सीरत पर रोशनी डालते हुए कहा कि हजरत मुहम्मद पूरी कायनात के लिए रहमत बनकर दुनिया में आए।उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम का पैगाम किसी एक जाति, कबीले या समुदाय के लिए नहीं था, बल्कि पूरी मानवता के लिए था। उनकी जिंदगी रहम, करुणा, इंसाफ, क्षमा और इंसानियत की मिसाल है। उन्होंने गरीबों, जरूरतमंदों, बच्चों और महिलाओं के साथ रहमदिली का व्यवहार करने की शिक्षा दी और जीव-जंतुओं के प्रति भी दया का संदेश दिया।
“पैगंबर का पैगाम सिर्फ जुलूस तक सीमित न रहे”
अन्य वक्ताओं ने कहा कि जश्ने ईद मिलादुन्नबी मनाने का मकसद केवल जुलूस निकालना नहीं, बल्कि नबी-ए-करीम की सीरत और शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में उतारना भी है।उन्होंने कहा कि बेटियों का सम्मान करना, मां-बाप की खिदमत करना, नमाज की पाबंदी करना, पड़ोसियों के हक अदा करना, जरूरतमंदों की मदद करना तथा हर धर्म और समुदाय के व्यक्ति के साथ मोहब्बत और सम्मान से पेश आना ही पैगंबर-ए-इस्लाम के पैगाम को आगे बढ़ाने का बेहतर जरिया है।
पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी से कायम रहा अमन-ओ-अमान
जुलूस में हजारों की संख्या में अकीदतमंदों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। जुलूस के निर्धारित मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती के साथ यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।विशाल जुलूस के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं जवानों ने पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने, जुलूस को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने और आम नागरिकों की आवाजाही को सुचारु रखने में पुलिस प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही।समाज के लोगों ने भी पुलिस प्रशासन के साथ पूरा सहयोग करते हुए अनुशासन बनाए रखा। मुस्लिम समाज के पदाधिकारियों एवं अकीदतमंदों ने शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजन संपन्न कराने के लिए पुलिस एवं प्रशासन का आभार व्यक्त किया। प्रशासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय के चलते इतना बड़ा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल बना आयोजन
जुलूस में समाज के आम और खास सहित बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान अकीदतमंदों ने अदब, अनुशासन और भाईचारे का परिचय दिया। जुलूस के स्वागत में जगह-जगह की गई व्यवस्थाओं और खाद्य-पेय पदार्थों के वितरण ने सामाजिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर पेश की।
जश्ने ईद मिलादुन्नबी का यह भव्य आयोजन गौरेला में केवल धार्मिक आस्था का पर्व बनकर नहीं रहा, बल्कि मोहब्बत, रहमत, इंसानियत, अमन और सामाजिक एकता का ऐसा संदेश छोड़ गया, जिसकी खुशबू पूरे शहर में देर तक महसूस होती रही। पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी, समाज के लोगों के अनुशासन और नागरिकों के सहयोग ने इस आयोजन को शांतिपूर्ण एवं यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



