विकास नंद/ सर्वव्यापी

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आजादी के 80 वर्ष और छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 26 वर्ष पूरे होने के बावजूद महासमुंद जिले का अंतिम विकासखंड सरायपाली आज भी कई मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से लगा सरायपाली भौगोलिक, व्यापारिक, राजनीतिक और आवागमन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां से विभिन्न राज्यों को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कें गुजरती हैं और क्षेत्र लंबे समय से एक महत्वपूर्ण पावर सेंटर के रूप में अपनी पहचान रखता है। इसके बावजूद विकास की बुनियादी जरूरतें अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
रेल सुविधा का आज भी इंतजार
सरायपाली क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरतों में रेल यातायात प्रमुख है। क्षेत्र के लोगों को आज भी रेल सुविधा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए दूसरे शहरों व राज्यों में आने-जाने वाले लोगों के लिए रेल संपर्क बेहद जरूरी है, लेकिन वर्षों से चली आ रही यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
अंतरराज्यीय बस स्टैंड भी अधूरा सपना
सरायपाली की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां आधुनिक अंतरराज्यीय बस स्टैंड की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। क्षेत्र से बड़ी संख्या में यात्री छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और अन्य राज्यों की ओर आवागमन करते हैं, लेकिन व्यवस्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल का अभाव आज भी बना हुआ है।
100 बिस्तर अस्पताल सुविधा 30 बिस्तरों तक सीमित
स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी सवाल खड़े करती है। सरायपाली में 100 बिस्तर अस्पताल का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने की थी और परंतु मांग लंबे समय से उठती रही है, व्यवस्था करीब 30 बिस्तरों तक सिमटकर रह गई है। आबादी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। गंभीर मरीज या तो प्राइवेट अस्पताल और दूसरे बड़े शहरों की ओर जाने को विवश हैं जो लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
जिला बनाने की मांग पर भी टिकी निगाहें
सरायपाली को जिला बनाने की मांग भी वर्षों से क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मांगों में शामिल रही है। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, व्यापारिक गतिविधियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए स्थानीय लोग इसे जिला बनाने की मांग करते रहे हैं। मगर अब तक इस मांग पर अंतिम निर्णय का इंतजार बना हुआ है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कमी
शिक्षा के क्षेत्र में भी सरायपाली को अपेक्षित विस्तार नहीं मिल पाया है। वीरेंद्र बहादुर महाविद्यालय क्षेत्र में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, लेकिन बढ़ती आबादी और विद्यार्थियों की जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त शासकीय महाविद्यालय की मांग लंबे समय से उठ रही है। स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
मजबूत राजनीतिक आधार, फिर भी अधूरी उम्मीदें
सरायपाली विधानसभा राजनीतिक रूप से छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सीटों में रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने समय-समय पर क्षेत्र के विकास को लेकर कई वादे और घोषणाएं की हैं। सत्ता बदलती रही, सरकारें आती-जाती रहीं, जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन आम लोगों की कई बुनियादी मांगें आज भी पूरी होने की प्रतीक्षा में हैं।
सरायपाली की जनता का सवाल अब केवल किसी एक सरकार या राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक नेतृत्व से है कि आखिर विकास के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को उसका अधिकार कब मिलेगा?सवाल विकास की प्राथमिकता कासरायपाली व्यापार, परिवहन और राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होने के बावजूद यदि आज भी रेल सुविधा, आधुनिक बस स्टैंड, पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च शिक्षा और जिला गठन जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह विकास की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
आजादी के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जब देश विकास की नई ऊंचाइयों की बात कर रहा है, तब सरायपाली के लोग भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके क्षेत्र की दशकों पुरानी मांगें अब केवल चुनावी वादे न रहकर धरातल पर विकास की नई तस्वीर बनेंगी।



