
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
दिल्ली और अहमदाबाद में बड़े भवनों से जुड़ी हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व लोकसभा सांसद प्रत्याशी एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रवक्ता धनीराम यादव ने छत्तीसगढ़ सरकार से प्रदेश में निर्मित और निर्माणाधीन बड़े भवनों की सुरक्षा तथा निर्माण गुणवत्ता की व्यापक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तेजी से बन रहे हॉस्टल, पीजी, अस्पताल, स्कूल, मॉल और हाईराइज इमारतों में निर्माण मानकों तथा इस्तेमाल किए जा रहे कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है।धनीराम यादव ने कहा कि बड़े शहरों में पढ़ाई, रोजगार और बेहतर भविष्य का सपना लेकर दूसरे राज्यों से आने वाले हजारों युवा हॉस्टल और पीजी में रहते हैं। ऐसे में यदि भवन निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है तो इसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर भवनों के निर्माण के समय निर्धारित मापदंडों का कितना गंभीरता से पालन किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बिल्डरों का पूरा ध्यान अधिक से अधिक मुनाफा कमाने पर रहता है और निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग तथा आपातकालीन सुविधाओं जैसे जरूरी पहलुओं की अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। बड़े-बड़े भवनों में हॉस्टल, पीजी, अस्पताल और स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तक पर्याप्त नहीं हैं।सपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सरकार और शासन-प्रशासन को हादसा होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले से ही निगरानी और जांच की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रदेश में सभी बड़े भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे, निर्धारित तकनीकी मानकों, अग्नि सुरक्षा, पार्किंग, आपातकालीन निकासी व्यवस्था तथा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के आधार पर जांची जाए।धनीराम यादव ने विशेष रूप से पुरानी इमारतों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन पुरानी इमारतों में वर्तमान में अस्पताल, स्कूल, पीजी, हॉस्टल अथवा अन्य संस्थाएं संचालित हो रही हैं, उनकी भी तत्काल तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि कोई भवन सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो वहां संस्थाओं का संचालन तत्काल रोकने की कार्रवाई की जाए।उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी समय-समय पर सरकार और प्रशासन को जनहित से जुड़े मुद्दों पर सचेत करने का काम करती रही है। सरकार को इन चेतावनियों को राजनीतिक बयान न मानकर जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय समझना चाहिए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद व्यवस्था जागने की नौबत न आए।



