
नूर मोहम्मद, जिला ब्यूरो चीफ, रायपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(सर्वव्यापी)
छत्तीसगढ़ में वर्षों से शासकीय सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से दो टूक मांग की है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए तत्काल स्पेशल TET आयोजित की जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में न फंसे।फेडरेशन के प्रदेश संगठन सचिव एवं रायपुर संभाग प्रभारी आलोक शुक्ला ने मुख्यमंत्री एवं स्कूल शिक्षा मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि वर्षों की सेवा के बाद शिक्षकों को अचानक ऐसी परीक्षा की बाध्यता के सामने खड़ा करना गंभीर चिंता का विषय है। शासन को शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए विशेष अवसर उपलब्ध कराना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी चुनौती
आलोक शुक्ला ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के 01 सितम्बर 2025 के आदेश के बाद TET सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया गया है। वहीं 29 मई 2026 के आदेश के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। ऐसे में प्रदेश के हजारों कार्यरत शिक्षकों के सामने निर्धारित समयसीमा के भीतर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की चुनौती खड़ी हो गई है।फेडरेशन का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो 20 से 25 वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे अनुभवी शिक्षकों के भविष्य को केवल परीक्षा की बाध्यता के आधार पर संकट में डालना उचित नहीं होगा।
जब उत्तर प्रदेश दे सकता है विशेष अवसर, तो छत्तीसगढ़ क्यों पीछे?
शिक्षक फेडरेशन ने उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय को छत्तीसगढ़ के लिए भी उदाहरण बताते हुए कहा कि वहां अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा द्वारा 02 सितम्बर 2026 को शासनादेश जारी कर प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं विशेष शिक्षकों (CWSN) के लिए स्पेशल TET आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित परीक्षा का पैटर्न 150 अंक, 150 मिनट, बिना नेगेटिव मार्किंग रखा गया है। उत्तीर्ण होने के लिए सामान्य वर्ग हेतु 60 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के लिए 55 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।फेडरेशन का सवाल है कि जब उत्तर प्रदेश वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष TET का रास्ता खोल सकता है, तो छत्तीसगढ़ सरकार अपने शिक्षकों को ऐसा अवसर देने से पीछे क्यों रहे?
“अब फैसला टालने का नहीं, शिक्षकों को राहत देने का समय”
आलोक शुक्ला ने कहा कि सरकार को इस गंभीर विषय को महज परीक्षा संबंधी प्रक्रिया मानकर टालना नहीं चाहिए। यह सीधे तौर पर हजारों शिक्षकों की नौकरी, सम्मान और भविष्य से जुड़ा मामला है।उन्होंने मांग की कि 31 अगस्त 2028 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन तत्काल विशेष TET आयोजित करने का निर्णय ले और इसके लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करे।उन्होंने कहा कि वर्षों तक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अपने अनुभव से मजबूत करने वाले शिक्षकों को एक विशेष, व्यावहारिक और न्यायसंगत अवसर मिलना चाहिए। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है—देखना यह है कि शासन शिक्षकों की इस मांग पर कितनी जल्दी निर्णय लेता है।




