Newsछत्तीसगढ़बिलासपुर

शराब पीकर स्कूल पहुंचना शिक्षक को पड़ा भारी, मेडिकल जांच के बाद निलंबन की अनुशंसा।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

मुंगेली जिले में शिक्षा के मंदिर की गरिमा को शर्मसार करने वाले एक मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मुंगेली विमित्रा घृतलहरे ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केशलीकला में पदस्थ शिक्षक उमेश कुमार यादव के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनका चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल मुलाहिजा) कराया है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर संबंधित शिक्षक के निलंबन की अनुशंसा करते हुए प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है।

बीईओ कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार 22 जुलाई 2026 को शैक्षिक समन्वयक के आकस्मिक निरीक्षण एवं व्हाट्सएप पर प्राप्त वीडियो के आधार पर शिकायत मिली कि शिक्षक विद्यालय समय के दौरान शराब के नशे में स्कूल पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान विद्यालय खुलने के लगभग आधे घंटे बाद भी शिक्षक विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए। वहीं जांच में यह भी सामने आया कि इससे पहले भी वे लगातार दो दिनों तक बिना अनुमति के विद्यालय से अनुपस्थित रहे थे।

शिक्षा विभाग ने इस कृत्य को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए आदर्श होता है। ऐसे में नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना न केवल शासकीय कर्मचारी आचरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे विभाग की छवि भी धूमिल होती है और विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होता है। संबंधित शिक्षक को दो दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे तथा स्पष्ट किया गया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच 27 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत केशलीकला के सरपंच ने पुनः दूरभाष के माध्यम से सूचना दी कि संबंधित शिक्षक फिर शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे हैं। शिकायत में बताया गया कि शिक्षक के इस व्यवहार से छात्र-छात्राओं में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीईओ ने थाना प्रभारी फास्टरपुर को पत्र भेजकर शिक्षक का तत्काल मेडिकल मुलाहिजा कराने का अनुरोध किया।

चिकित्सकीय परीक्षण की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षक के निलंबन की अनुशंसा उच्च अधिकारियों को भेज दी है। विभाग का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद जिले में शिक्षा व्यवस्था, विद्यालयों में अनुशासन तथा शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि विद्यालयों की गरिमा बनी रहे और विद्यार्थियों के लिए स्वस्थ एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!