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जय कौशिक की पुस्तक मुसाफिर- मंजिल की ओर बढ़ता कदम की खूब हो रही चर्चा।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

किताबे शिक्षक के जीवन की यह बहुत बड़ी उपलब्धी होती है जब उनकी खुद के विचार और लेख समाज को संदेश देते हैं मुसाफिर मंजिल की ओर बढ़ता जय कौशिक द्वारा लिखित पुस्तक नवम्बर में हर घर तक पहुंच जायेगा । यह किताब एक सुखद यात्रा है एक शिक्षक जो उन्होंने शिक्षकीय जीवन में बच्चों के चेहरे में खुशी भर कर कमाई है और घर परिवार दोस्त समाज को एक संदेश है कि जीवन का सफर एक ऐसी यात्रा है जिस पर हर व्यक्ति मुसाफिर है और हर सफर में एक अनुभव जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी बन जाती है जो उसे मंजिल तक पहुंचने के लिए प्रेरणा देती है। मंजिल पर हर व्यक्ति पहुंचना चाहता है जो जीवन में कमाई हुई खुशी होती है जो प्राप्त है वहीं पर्याप्त है सफर की शुरुआत यहां से होती है और समापन यादें खुशियो से होगी । इस संदेश के साथ इस पुस्तक में शिक्षक और विद्यार्थी सहित समाज के हर व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ संदेश देने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में कुछ ऐसे लेख है जो सबको प्रभावित करेंगे जीवन के रास्ते, भागदौड़,सीख,विश्वास, स्वयं के प्रति जिम्मेदारी, दिव्य अनुभव, सच्चा साथी कौन,जिगरी यार, वक्त,मेरी मंजिल,मैं और तुम, जीवन का सच्चा आनंद, व्यक्तित्व विकास , ध्यान, अंतिम सत्य,बेटी , खुशी,समर्पण,जीना सीखे ,मुस्कान,खुद से मिलो, आंसू, चलते रहना, जिंदगी क्या है, केदारनाथ बद्रीनाथ, पशुपतिनाथ और अमरनाथ की यादें,मोड़ से घबराना कैसा, सफर से सम्मान तक की यात्रा और गहरी सोच,मैं राहों का मुसाफिर , प्रेम ही मेरा पथ है,पग पग पर, आंसू ऐसे विषय पर राज्यपाल शिक्षक सम्मान प्राप्त व्याख्याता जय कौशिक की प्रेरणादायक पुस्तक मुसाफिर में 30 दिन में जीवन बदले शिवपथ का अविराम यात्रा कैलाश मानसरोवर का सुख और परिवार समाज के साथ सुखद पल बिताने और हर पल को खुशियों से भरने का संदेश भी है जय कौशिक कहते हैं शिक्षक राष्ट्र का निर्माता है इसलिए उसे अपने जीवन को आदर्श बनाना चाहिए ताकी लोग उनके बताये मार्ग का अनुसरण करें योग पथ और जीवन पथ की गहराई और स्वस्थ जीवन का आधार है ध्यान प्राणायाम जो जीवन का सार है वे कहते हैं जो एक लेख को भी अपने जीवन में साध लेंगे वह सुख पायेगा और खुशी मंजिल तक आसानी से पहुंचा देगा और जो भाव और शब्दों की गहराई में नहीं पहुंच पाते उसके लिए भी पुस्तक में कुछ सामान्य लेख भी है जो बहुत अच्छा लगेगा । जय कौशिक की शिक्षकीय सोच और उनके मुसाफिर के संदेश बच्चो को सफलता की ओर ले जाता है हर एक पन्ने में मंजिल की ओर बढ़ता कदम का भाव है लेखक कहते हैं शिक्षक और मां-बाप दोनों से ज्यादा बच्चो का शुभचिंतक कोई नहीं होता है बच्चो पर विश्वास करने से बच्चो को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है ऐसा संदेश मुसाफिर को और बेहतर बनाता है मुसाफिर का सार प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से जीवन की सार्थकता को समझाने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है बच्चो और शिक्षको को यह प्रेरित करेगा आगे बढ़ने के लिए ,मंजिल तक सभी को पहुंचाने में मददगार होगा । समाज और हर व्यक्ति को यह बहुत ही पसंद आयेगा।

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