
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत लगरा, बिलासपुर स्थित एनएसएस कैंप में तंबाकू नशा मुक्ति अभियान 4.0 के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों एवं स्कूली छात्र-छात्राओं को तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए तंबाकू मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू सेवन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखना तथा समाज में स्वस्थ जीवनशैली का संदेश पहुंचाना रहा।इस अवसर पर डॉ. अनुपम नाहक, डॉ. योगेंद्र नाथ चौहान एवं जिला चिकित्सालय बिलासपुर के सोशल वर्कर सुनील श्रीवास ने उपस्थित ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने सरल भाषा में बताया कि बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी एवं अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन मुख कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग तथा श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।तंबाकू के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाहस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को आगाह किया कि मुंह में सफेद या लाल धब्बे, लंबे समय तक ठीक नहीं होने वाले छाले, मुंह खोलने में परेशानी तथा आवाज में लगातार बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।कार्यक्रम में निष्क्रिय धूम्रपान यानी पैसिव स्मोकिंग के खतरों पर भी विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने वाले बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी तंबाकू के धुएं से प्रभावित होते हैं। इसलिए घरों एवं सार्वजनिक स्थानों को धूम्रपान मुक्त रखना बेहद जरूरी है।तंबाकू की लत स्वास्थ्य के साथ आर्थिक स्थिति को भी करती है प्रभावितवक्ताओं ने समझाया कि तंबाकू सेवन की आदत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। प्रतिदिन तंबाकू पर खर्च होने वाली छोटी-छोटी रकम लंबे समय में बड़ी राशि बन जाती है। इस धन का उपयोग बच्चों की शिक्षा, पौष्टिक आहार और परिवार की अन्य आवश्यकताओं पर किया जा सकता है। उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति, पारिवारिक सहयोग और चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से तंबाकू की लत छोड़ने का आह्वान किया।विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का दिया संदेशकार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं को कम उम्र में तंबाकू एवं अन्य नशे की शुरुआत से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को गलत संगति और साथियों के दबाव से बचने, अपने स्वास्थ्य एवं भविष्य के प्रति जिम्मेदार रहने तथा किसी भी प्रकार के नशे के प्रलोभन से दूर रहने की समझाइश दी गई। साथ ही उन्हें अपने माता-पिता एवं परिवार के सदस्यों को भी तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की गई।इस दौरान कोटपा अधिनियम 2003 के प्रमुख प्रावधानों, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध और तंबाकू नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियां भी साझा की गईं।कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों से अपने घर, परिवार, विद्यालय और गांव को तंबाकू मुक्त बनाने का संकल्प लेने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि तंबाकू मुक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।तंबाकू छोड़ें, जीवन बचाएं। स्वस्थ परिवार, सुरक्षित बचपन और तंबाकू मुक्त गांव ही स्वस्थ समाज की असली पहचान है।




