
विकास नंद/सर्वव्यापी
महासमुंद जिले में ग्रामीण विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पंचायत स्तर की समस्याओं के समाधान को लेकर अब सबकी निगाहें नवपदस्थ जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद पर हैं। सरायपाली एसडीएम के रूप में अपनी ईमानदार, निष्पक्ष और संवेदनशील कार्यशैली के लिए पहचान बना चुकीं आईएएस अधिकारी अनुपमा आनंद को अब पूरे जिले के ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
महासमुंद जिले की राजनीतिक परिस्थितियां भी संतुलित (50-50) मानी जाती हैं। जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और सत्तारूढ़ भाजपा दोनों का मजबूत प्रभाव है। ऐसे में पंचायतों से जुड़े विकास कार्यों, जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना जिला पंचायत सीईओ के लिए आसान नहीं होगा।हाल के दिनों में जिला पंचायत अध्यक्ष, दोनों दलों के निर्वाचित सदस्यों और तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ के बीच विवाद सुर्खियों में रहा था। ऐसे माहौल में अनुपमा आनंद की नियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।ग्रामीण क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन, लंबित शिकायतों के त्वरित निराकरण, जीरो प्वाइंट स्तर तक प्रभावी मॉनिटरिंग, पंचायत प्रतिनिधियों के साथ संवाद और विभागीय समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिक चुनौतियों में शामिल होगा। पंचायत प्रतिनिधियों की यह अपेक्षा भी रहेगी कि विकास कार्यों में तेजी आए और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
साय सरकार की ग्रामीण विकास संबंधी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी अब जिला पंचायत सीईओ के कंधों पर है। एक विकासखंड से आगे बढ़कर पूरे जिले की विकास व्यवस्था का नेतृत्व कर रहीं अनुपमा आनंद प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के बीच कितना बेहतर तालमेल स्थापित कर पाती हैं और विकास कार्यों को कितनी गति दे पाती हैं, इस पर आने वाले समय में सबकी नजर रहेगी।
फिलहाल इतना तय है कि महासमुंद जिले में ग्रामीण विकास की दिशा और प्रशासनिक कार्यशैली की नई परीक्षा शुरू हो चुकी है, जिसका परिणाम आने वाले समय में जिले की विकास यात्रा तय करेगा।



