तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

प्रदेश में होमगार्ड जवानों के वेतन, महंगाई भत्ते और बकाया एरियर्स को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। होमगार्ड जवानों से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा किए जा रहे भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और न्यायालय के आदेश में जिन आर्थिक लाभों का उल्लेख किया गया है, उनका वास्तविक रूप से कितना पालन हुआ है, इसकी जांच की जानी चाहिए। जवानों का आरोप है कि सरकार अपनी ओर से किए जा रहे भुगतान को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि न्यायालय के आदेश के अनुसार उन्हें मिलने वाले संपूर्ण लाभों की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।जवानों से जुड़े लोगों के अनुसार, इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल वर्ष 2022 से मिलने वाले एरियर्स का है। उनका दावा है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार वर्ष 2022 से बढ़ी हुई राशि का भुगतान किया जाना है, लेकिन संबंधित जवानों को अब तक इसका पूरा लाभ नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि न्यायालय ने निर्धारित अवधि से बकाया राशि देने का निर्देश दिया है, तो शासन और संबंधित विभाग ने उस दिशा में क्या कार्रवाई की है? क्या सभी पात्र जवानों को एरियर्स का भुगतान कर दिया गया है, अथवा अभी भी बड़ी राशि बकाया है? इन सवालों पर संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना आवश्यक है।होमगार्ड जवानों से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी निर्णय का मूल्यांकन केवल सरकार द्वारा किए गए भुगतान या जारी की गई घोषणा के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि न्यायालय के मूल आदेश का अध्ययन करके यह देखना चाहिए कि उसमें क्या-क्या निर्देश दिए गए थे और शासन ने उनका कितना पालन किया है। उनका आरोप है कि न्यायालय के आदेश के सभी पहलुओं को सामने रखे बिना समाचार प्रकाशित होने से वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए न्यायालय के आदेश, शासन के निर्देशों और जवानों को वास्तव में किए गए भुगतान का तुलनात्मक परीक्षण जरूरी है।इस पूरे मामले में महंगाई भत्ते को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जवानों से जुड़े लोगों का दावा है कि महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत की दर से मिलना चाहिए, जबकि छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत की दर से भुगतान होने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही उनका कहना है कि होमगार्ड जवानों को पुलिस के न्यूनतम वेतन के साथ 60 प्रतिशत महंगाई भत्ते के अनुरूप भुगतान मिलना चाहिए था। हालांकि, होमगार्ड जवानों पर पुलिस कर्मचारियों के वेतनमान और महंगाई भत्ते से संबंधित नियम सीधे लागू होते हैं या नहीं, यह न्यायालय के आदेश, संबंधित सेवा नियमों और शासन द्वारा जारी अधिसूचनाओं पर निर्भर करेगा। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि आवश्यक है।जवानों से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि होमगार्ड जवानों के लिए वर्तमान में कौन-सा वेतनमान निर्धारित है, महंगाई भत्ते की स्वीकृत दर क्या है और वर्ष 2022 से अब तक की अवधि के लिए कितनी राशि देय बनती है। यदि न्यायालय के आदेश के अनुसार एरियर्स का भुगतान किया जाना है, तो इसकी गणना कर पात्र जवानों को भुगतान की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके अलावा, यदि किसी निर्देश का पालन नहीं हुआ है, तो उसके कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि जवानों के बीच व्याप्त असमंजस दूर हो सके।मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि न्यायालय के आदेश का वास्तविक आशय समझे बिना सरकार या विभाग के पक्ष में अथवा उसके विरुद्ध अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। न्यायालय ने वेतन निर्धारण, महंगाई भत्ते, एरियर्स और भुगतान की प्रभावी तिथि को लेकर जो भी निर्देश दिए हैं, उनकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसके बाद ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि शासन ने आदेश का पूर्ण पालन किया है या कुछ आर्थिक लाभों का भुगतान अब भी शेष है।अब सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार होमगार्ड जवानों को न्यायालय के आदेश के अनुरूप सभी देय आर्थिक लाभ प्रदान कर रही है? क्या वर्ष 2022 से बकाया एरियर्स का भुगतान किया गया है और महंगाई भत्ते की दर को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग के पास कोई स्पष्ट जवाब है? होमगार्ड जवानों के हितों से जुड़े इस मामले में संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर जवानों को उनके अधिकारों की जानकारी मिल सके और न्यायालय के आदेश के पालन को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे।फिलहाल, इस मामले में न्यायालय के मूल आदेश, संबंधित शासनादेश और वास्तविक भुगतान विवरण का परीक्षण सबसे जरूरी है। इन दस्तावेजों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि होमगार्ड जवानों को वर्ष 2022 से कितना एरियर्स मिलना है, महंगाई भत्ते की सही दर क्या है और सरकार ने न्यायालय के निर्देशों का कितना पालन किया है।




