तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर में यातायात नियमों के पालन को लेकर पुलिस द्वारा आम नागरिकों के वाहनों की जांच और चालानी कार्रवाई लगातार की जाती है। लेकिन इसी व्यवस्था को लेकर अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यातायात नियम सभी के लिए समान हैं? यदि आम नागरिक से वाहन का प्रदूषण प्रमाण-पत्र, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो पुलिस विभाग के कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के निजी वाहनों की भी क्या उसी स्तर पर जांच होती है?हाईकोर्ट आवासीय परिसर के आसपास प्रतिदिन निजी वाहनों से पहुंचकर पुलिसकर्मियों द्वारा वाहन जांच किए जाने की चर्चा के बीच नागरिकों का सवाल है कि जिन पुलिसकर्मियों के निजी वाहनों से वाहन जांच की जाती है, क्या उन वाहनों के प्रदूषण प्रमाण-पत्र, बीमा, पंजीयन और ड्राइविंग लाइसेंस भी नियमानुसार जांचे जाते हैं?आम नागरिकों का कहना है कि यातायात नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी पुलिस की है, लेकिन नियमों की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है जब उनका पालन आमजन और सरकारी कर्मचारियों—दोनों पर समान रूप से हो। यदि किसी पुलिसकर्मी के निजी वाहन में आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, तो क्या उसके विरुद्ध भी उसी तरह चालान काटा जाता है, जिस तरह आम वाहन चालक का चालान किया जाता है?सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि पुलिसकर्मी निजी वाहन से ड्यूटी अथवा वाहन जांच स्थल तक पहुंचते हैं, तो क्या उनके वाहनों की विभागीय अथवा यातायात पुलिस द्वारा नियमित जांच होती है? यदि होती है तो इसकी कार्रवाई और चालान का सार्वजनिक रिकॉर्ड क्या है?नियम सबके लिए बराबर हैं या वर्दी देखकर बदल जाते हैं?यातायात व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना है। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस विभाग स्वयं भी उदाहरण प्रस्तुत करे। यदि आम नागरिक से बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र और लाइसेंस मांगा जाता है, तो पुलिसकर्मियों के निजी वाहनों की भी उसी कसौटी पर जांच होनी चाहिए।इस पूरे मामले में संबंधित यातायात पुलिस अधिकारियों से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि हाईकोर्ट आवासीय परिसर के आसपास वाहन जांच के दौरान अब तक कितने निजी वाहनों की जांच हुई, कितने चालान काटे गए और उनमें पुलिस विभाग के कर्मचारियों के निजी वाहन शामिल थे या नहीं।सवाल सीधा है—कानून की नजर में वाहन महत्वपूर्ण है या वाहन चालक की वर्दी? यदि नियम समान हैं, तो उनकी पालना भी समान दिखाई देनी चाहिए।




