
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
शिक्षा विभाग में लंबे समय से विवादों में घिरे कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि जिन मामलों में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और कार्यालयीन कर्मचारियों की भूमिका को लेकर शिकायतें एवं गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं, उनमें अब तक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में ठोस कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही है?बिलासपुर शिक्षा विभाग में एक तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और एक कर्मचारी को लेकर भी तरह-तरह के आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं। संबंधित कर्मचारी द्वारा स्वयं को प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का रिश्तेदार बताए जाने की बात भी चर्चा में है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा राजनीतिक या प्रभावशाली संबंधों का दावा कर विभागीय कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश की गई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जाती?कार्रवाई की जगह जिम्मेदारी बदलने पर सवालशिक्षा विभाग में किसी भी अनियमितता की स्थिति में केवल वर्तमान अधिकारी से जवाब मांगना पर्याप्त है या उस समय पदस्थ अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए—यह सवाल अब महत्वपूर्ण हो गया है।यदि किसी मामले में तत्कालीन डीईओ के कार्यकाल के दौरान निर्णय लिए गए थे, तो जांच का दायरा उस समय पदस्थ अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचना स्वाभाविक है। लेकिन यदि कार्रवाई केवल वर्तमान पदाधिकारी की जवाबदेही तय करने तक सीमित रहती है, तो इससे विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं।हाल के महीनों में बिलासपुर के डीईओ पद को लेकर भी विवाद सामने आया था। रामेश्वर जायसवाल की प्रभारी डीईओ के रूप में नियुक्ति को वरिष्ठ प्राचार्यों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की कार्यवाही और उसके बाद विभागीय स्तर पर हुए बदलाव इस बात को रेखांकित करते हैं कि बिलासपुर शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फैसले लगातार सार्वजनिक रहे हैं।क्या होगी निष्पक्ष जांच?अब सवाल यह है कि विभाग उन पुराने मामलों की भी समीक्षा करेगा या नहीं, जिनमें तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है और यदि प्रथमदृष्टया अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जा सकती है।सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है—क्या शिक्षा विभाग में कार्रवाई व्यक्ति देखकर होगी या दस्तावेज और तथ्यों के आधार पर?बिलासपुर के शिक्षक, कर्मचारी और आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच कब होगी और दोष सिद्ध होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?अब निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों पर हैं कि वे इन सवालों का जवाब जांच के माध्यम से देते हैं या मामला एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाता है।




