
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षकों से उनके नियमित सेवा संबंधी कार्यों के लिए कथित रूप से राशि मांगने, प्रकरणों को महीनों लंबित रखने, आवेदन और मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र गायब होने तथा आवक-जावक में आवेदन लेने से इनकार करने जैसी शिकायतों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अम्बिकापुर ने सीतापुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 24 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में चार बिंदुओं पर मांगा गया स्पष्टीकरण महज प्रशासनिक जवाब-तलब नहीं, बल्कि सीतापुर बीईओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठी शिकायतों की गंभीरता को सामने लाता है। नोटिस में जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि शिकायतें छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन द्वारा उनके समक्ष प्रस्तुत की गई थीं।छुट्टी और वेतन के मामलों में 5-6 महीने से लेकर एक साल तक की देरी?नोटिस के अनुसार, कई शिक्षकों के अर्जित अवकाश एवं मेडिकल अवकाश की स्वीकृति तथा उससे जुड़े वेतन भुगतान के प्रकरण पांच-छह महीने से लेकर लगभग एक वर्ष तक लंबित होने की शिकायत सामने आई है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन प्रकरणों के निराकरण के लिए सहायक ग्रेड-03 अभिषेक गुप्ता, निरंजन बड़ा तथा स्वयं बीईओ द्वारा कथित रूप से राशि की मांग की जाती है।हालांकि, ये आरोप फिलहाल शिकायत और कारण बताओ नोटिस में दर्ज आरोप हैं। इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित विभागीय जांच अथवा सक्षम जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद ही होगा।आवेदन और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट कहां गायब हो गए?मामले का सबसे गंभीर पहलू शिक्षकों के अवकाश आवेदन एवं मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट कार्यालय से गायब होने की शिकायत है।यदि किसी सरकारी कार्यालय में किसी कर्मचारी का सेवा संबंधी आवेदन या चिकित्सा प्रमाण-पत्र जमा होने के बाद रिकॉर्ड से गायब हो जाता है, तो सवाल केवल लापरवाही का नहीं बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर उठता है।ऐसे में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित दस्तावेज कार्यालय में कब जमा हुए, किस कर्मचारी ने उन्हें प्राप्त किया, आवक पंजी में उनका उल्लेख हुआ या नहीं और बाद में उनका रिकॉर्ड कहां गया।आवक-जावक में आवेदन लेने से कथित इनकार, पावती भी नहीं!नोटिस में यह भी उल्लेख है कि संबंधित बाबुओं और बीईओ द्वारा कथित तौर पर आवक-जावक में आवेदन लेने से मना किया जाता है। परिणामस्वरूप शिक्षक अपने आवेदन की पावती तक प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।यही बिंदु पूरे मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि आवेदन की पावती किसी भी कर्मचारी के लिए यह प्रमाण होती है कि उसका प्रकरण कार्यालय में प्रस्तुत हुआ है।यदि पावती ही नहीं मिले तो किसी आवेदन के लंबित रहने या गायब होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो सकता है।नियमितीकरण, परीक्षा अनुमति और सर्विस बुक भी सवालों के घेरे मेंशिकायतें केवल अवकाश और वेतन भुगतान तक सीमित नहीं हैं। नोटिस में परिवीक्षा अवधि पूरी कर चुके पात्र शिक्षकों के नियमितीकरण प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजने, परीक्षा अनुमति आदेश जारी करने, सर्विस बुक संधारण तथा जीपीएफ पासबुक/अभिलेखों को अपडेट करने में अनावश्यक देरी की शिकायतों का भी उल्लेख है।इन कार्यों के लिए भी कथित रूप से राशि मांगने के आरोप लगाए गए हैं।यानी शिकायतों का दायरा इतना व्यापक है कि यदि आरोपों की स्वतंत्र जांच में पुष्टि होती है तो मामला केवल किसी एक फाइल या कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे कार्यालय की कार्यप्रणाली और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था की जांच का विषय बन सकता है।डीईओ ने कहा—सही पाए जाने पर घोर लापरवाही और अनुशासनहीनताजिला शिक्षा अधिकारी ने नोटिस में कहा है कि यदि कार्यालयीन कार्यों में इस प्रकार का आचरण पाया जाता है तो यह घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत है।बीईओ संतोष कुमार सिंह को दो दिवस के भीतर उपस्थित होकर बिंदुवार अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब संतोषप्रद नहीं होने अथवा निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने की चेतावनी भी दी गई है। अब असली सवाल—शिकायतों की जांच कितनी गहराई तक जाएगी?इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या विभाग केवल बीईओ से स्पष्टीकरण लेकर मामला समाप्त करेगा या फिर शिकायतों में नामित कर्मचारियों की भूमिका, आवक-जावक रजिस्टर, लंबित प्रकरणों, सर्विस बुक, जीपीएफ रिकॉर्ड, मेडिकल प्रमाण-पत्र और संबंधित फाइलों की स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी?क्योंकि आरोप केवल कथित राशि मांगने तक सीमित नहीं हैं। फाइलों के लंबित रहने, दस्तावेजों के गायब होने और आवेदन की पावती नहीं देने जैसे आरोपों की पुष्टि या खंडन दस्तावेजी जांच से अपेक्षाकृत स्पष्ट किया जा सकता है।जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से यह मामला कलेक्टर सरगुजा, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय और संयुक्त संचालक शिक्षा, सरगुजा संभाग को भी सूचनार्थ भेजा गया है। अब निगाह इस बात पर है कि बीईओ का स्पष्टीकरण क्या सामने आता है, विभागीय जांच किस दिशा में बढ़ती है और शिक्षकों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के पीछे वास्तविकता क्या है। फिलहाल विभागीय दस्तावेज में आरोप दर्ज हैं, जबकि अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकल सकेगा।




