
विकास नंद/ सर्वव्यापी

सामाजिक सरोकारों से जुड़कर सेवा की शुरुआत करने वाली सरला कोसरिया आज महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक सक्रियता की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आई हैं। गायत्री परिवार से जुड़कर समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और अपने निरंतर संघर्ष, समर्पण और संगठनात्मक क्षमता के बल पर एक अलग पहचान बनाई।सरला कोसरिया का राजनीतिक एवं सामाजिक सफर सहज नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ किया। संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी मिली।
विधानसभा चुनाव में मिली जिम्मेदारी, हार के बाद भी नहीं टूटा हौसला
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सरला कोसरिया को सरायपाली विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया। चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा, लेकिन उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक यात्रा का विराम नहीं बनने दिया। चुनावी सफलता नहीं मिलने के बावजूद सरला कोसरिया लगातार भाजपा संगठन की मजबूती के लिए सक्रिय रहीं और कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच बनाए रखी।उनका यही जज्बा उन्हें संगठन में एक सम्माननीय वरिष्ठ नेत्री के रूप में पहचान दिलाता है। चुनावी परिणाम से निराश होकर पीछे हटने के बजाय उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों को और मजबूती से आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में महिलाओं की आवाज
वर्तमान में सरला कोसरिया राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में महिलाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से उठाने और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। महिलाओं की समस्याओं, अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता उन्हें महिला वर्ग के बीच एक संवेदनशील और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित करती है।महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय के मामलों में आवाज उठाना, उनकी समस्याओं को संबंधित मंच तक पहुंचाना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयास करना उनके वर्तमान दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संगठन में मजबूत पकड़, प्रदेश से लेकर केंद्र तक पहचान
सरला कोसरिया की पहचान केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। भाजपा संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण प्रदेश संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी और वरिष्ठ नेताओं के साथ निरंतर संवाद ने उन्हें व्यापक राजनीतिक पहचान दिलाई है।केंद्र स्तर पर भी भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच उनकी सक्रियता और संपर्क उन्हें संगठन की वरिष्ठ महिला नेताओं में अलग स्थान दिलाते हैं। यही कारण है कि सरला कोसरिया आज सरायपाली ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी एक पहचाना हुआ नाम बन चुकी हैं।
संघर्ष, समर्पण और सेवा बनी पहचान
सरला कोसरिया की राजनीतिक यात्रा यह संदेश देती है कि सफलता केवल चुनाव जीतने से तय नहीं होती। जनसेवा के प्रति निरंतर समर्पण, संगठन के प्रति निष्ठा और विपरीत परिस्थितियों में भी सक्रिय बने रहना ही किसी नेता की वास्तविक पहचान बनाता है।
गायत्री परिवार से समाजसेवा की शुरुआत से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष, भाजपा संगठन की वरिष्ठ नेत्री और अब राज्य महिला आयोग की सदस्य तक का उनका सफर संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा है। महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए काम करने के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने की उनकी निरंतर कोशिश उन्हें महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायी मिसाल बनाती है।
जन्मदिन पर शुभकामनाओं का दौर
आज सरला कोसरिया के जन्मदिन के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
उनके समर्थकों का कहना है कि जिस तरह उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने जज्बे को कायम रखते हुए समाजसेवा और संगठन के प्रति अपनी सक्रियता जारी रखी है, वह नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है।
जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर सरला कोसरिया को स्वस्थ, सफल और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं।




