
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
सरकारी स्कूलों में कहीं विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले शिक्षक अधिक हैं तो कहीं कक्षाओं के अनुपात में शिक्षकों की कमी—ऐसी चर्चाओं के बीच शिक्षा विभाग ने अब पूरे दुर्ग संभाग के स्कूलों का आंकड़ा जुटाने की कवायद शुरू कर दी है। संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा, दुर्ग द्वारा 22 सितंबर 2026 को जारी ज्ञाप में संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से 15 सितंबर 2026 की स्थिति में स्कूलवार शिक्षकों और विद्यार्थियों की दर्ज संख्या मांगी गई है।आदेश में दुर्ग संभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के साथ इग्नाइट, पीएम श्री, सेजेस, विवेकानंद तथा अनुदान प्राप्त विद्यालयों की जानकारी निर्धारित प्रपत्रों में मांगी गई है। जिला शिक्षा अधिकारियों को यह जानकारी 30 सितंबर 2026 तक हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, स्कूलों में संसाधनों के संतुलन का भीविभाग का यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि स्कूलवार शिक्षक और छात्र संख्या सामने आने के बाद यह देखा जा सकेगा कि किस विद्यालय में कितने विद्यार्थी हैं और उनके लिए कितने शिक्षक पदस्थ हैं। इससे शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, संभावित शिक्षक कमी, अतिरिक्त पदस्थापना अथवा विद्यार्थियों की कम संख्या वाले विद्यालयों में उपलब्ध मानव संसाधन जैसे मुद्दों पर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।हालांकि अभी विभाग ने आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए फिलहाल किसी स्कूल या जिले में शिक्षक अधिक अथवा कम होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। असली तस्वीर तब सामने आएगी, जब 15 सितंबर की स्थिति पर मांगी गई स्कूलवार जानकारी उपलब्ध होगी।नौ प्रपत्रों में मांगी गई जानकारी, निगाहें अब रिपोर्ट परज्ञाप के साथ निर्धारित प्रपत्र 01 से 09 संलग्न किए गए हैं। विभाग ने जानकारी हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में मांगी है और पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समय-सीमा का पालन इस तरह किया जाए कि कार्यालय को अलग से स्मरण पत्र जारी करने की आवश्यकता न पड़े।इस आदेश की प्रतिलिपि आयुक्त, दुर्ग संभाग; संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़; तथा संभाग के सभी कलेक्टरों को भी सूचनार्थ भेजी गई है। इससे संकेत मिलता है कि जुटाए जा रहे आंकड़े केवल विभागीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संभागीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का आकलन करने में भी उपयोगी हो सकते हैं।अब सामने आएगा कौन-सा स्कूल कितना भरा और कौन कितना खाली?सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 सितंबर की स्थिति में जब स्कूलवार आंकड़े सामने आएंगे, तब क्या सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध मिलेंगे? क्या किसी विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षक कम हैं? क्या कहीं विद्यार्थियों की संख्या कम और शिक्षकों की पदस्थापना अपेक्षाकृत अधिक है? और क्या इन आंकड़ों के आधार पर विभाग आगे शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण या पुनर्विन्यास की दिशा में कदम उठाएगा?फिलहाल इन सवालों का जवाब विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले आंकड़ों में छिपा है। 30 सितंबर की समय-सीमा के बाद स्कूलवार रिपोर्ट सामने आती है तो दुर्ग संभाग की सरकारी शिक्षा व्यवस्था का वास्तविक शिक्षक–विद्यार्थी गणित पहली बार आंकड़ों के आईने में साफ दिखाई दे सकता है।अब निगाह 30 सितंबर पर है—कागज पर दर्ज संख्या क्या कहती है और स्कूलों की जमीन पर वास्तविक तस्वीर क्या है, यह आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।




