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परीक्षा अवधि पूरी होने से पहले शिक्षिका का तबादला, साय सरकार के फैसले पर उठे सवाल.

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक निर्णयों की समय-सीमा और विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों पर सवाल उठने लगे हैं। परीक्षा अवधि समाप्त होने से पहले ही शिक्षिका प्रियंका का स्थानांतरण किए जाने का मामला सामने आया है। स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षिका की परीक्षा अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर परीक्षा अवधि पूरी होने से पहले स्थानांतरण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/694/2026-SCHOOL EDUCATION SECTION जारी किया गया है। इस आदेश के तहत शिक्षिका प्रियंका का प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण करते हुए नई पदस्थापना दी गई है।सूरजपुर से बिलासपुर जिले के तखतपुर भेजी गईं प्रियंकाविभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरल क्रमांक-1 में दर्ज शिक्षिका प्रियंका वर्तमान में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोरेया, संकुल केंद्र कंदरई, जिला सूरजपुर में पदस्थ हैं। आदेश के तहत उनका स्थानांतरण शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला लोखंडी, विकासखंड तखतपुर, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में किया गया है।बताया जा रहा है कि संबंधित शिक्षिका की परीक्षा अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में शैक्षणिक गतिविधियों के बीच किए गए इस स्थानांतरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस संबंध में विभागीय आदेश के पीछे के विस्तृत कारणों और संबंधित परीक्षा अवधि की आधिकारिक पुष्टि किया जाना आवश्यक है।परीक्षा अवधि के बीच तबादला, विद्यार्थियों की पढ़ाई का क्या होगा?शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों की पढ़ाई, पाठ्यक्रम की पूर्णता और परीक्षा की तैयारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होती हैं। ऐसे समय में किसी शिक्षक का स्थानांतरण किए जाने पर यह जानना जरूरी हो जाता है कि संबंधित विद्यालय में पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।यदि परीक्षा अवधि अभी जारी है, तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि स्थानांतरण का निर्णय किन प्रशासनिक परिस्थितियों में लिया गया। क्या संबंधित विद्यालय में शिक्षक की कमी की स्थिति का आकलन किया गया था? क्या उनके स्थान पर किसी अन्य शिक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है? और क्या स्थानांतरण से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका पर विचार किया गया?ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब स्कूल शिक्षा विभाग से अपेक्षित है।प्रशासनिक आधार पर आदेश, लेकिन औचित्य पर सवालशासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर किए जा सकते हैं। इसलिए केवल परीक्षा अवधि समाप्त नहीं होने के आधार पर किसी आदेश को नियमविरुद्ध नहीं कहा जा सकता। इसके लिए लागू स्थानांतरण नीति, विभागीय निर्देशों और आदेश के पीछे के वास्तविक कारणों की जांच जरूरी है।लेकिन यदि किसी स्थानांतरण से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है, तो विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करे। प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के साथ-साथ शैक्षणिक हितों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।साय सरकार से सवाल—विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि या प्रशासनिक आदेश?मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के सामने यह सवाल है कि परीक्षा अवधि पूरी होने से पहले शिक्षिका का स्थानांतरण किन परिस्थितियों में किया गया। क्या इस निर्णय के पीछे कोई विशेष प्रशासनिक आवश्यकता थी? क्या संबंधित विद्यालय में वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की गई है? और क्या विभाग ने विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का आकलन किया है?फिलहाल, स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह मामला चर्चा में है। अब देखना होगा कि विभाग इस स्थानांतरण को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या परीक्षा अवधि तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए आदेश की समीक्षा की जाती है।सवाल केवल एक शिक्षिका के स्थानांतरण का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक निर्णयों की प्राथमिकता का भी है। यदि परीक्षा अवधि के दौरान स्थानांतरण अपरिहार्य था, तो उसके ठोस कारण सामने आने चाहिए। आखिरकार, किसी भी प्रशासनिक निर्णय की सफलता का आकलन इस आधार पर भी होना चाहिए कि उससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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