
विकास नंद/सर्वव्यापी
इंदौर में कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री और ‘मां को कुर्सी दो’ जैसे संवेदनशील प्रसंग को हास्य का विषय बनाए जाने पर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रमोद सागर ने तीखी आपत्ति जताई है।प्रमोद सागर ने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री पद की गरिमा और मातृशक्ति के सम्मान को राजनीतिक मनोरंजन का विषय बनाना भारतीय संस्कारों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रसंग राहुल गांधी की मौजूदगी में उनके मंच पर हुआ और वीडियो में राहुल गांधी की प्रतिक्रिया भी दिखाई देती है।उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के नेता प्रतिपक्ष हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे लोकतांत्रिक विमर्श को गरिमा प्रदान करें। ऐसे में मंच से हुए किसी भी प्रसंग को लेकर उनकी भूमिका और प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।प्रमोद सागर ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसी बुजुर्ग महिला को सम्मानपूर्वक बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध कराने की संवेदनशील घटना आखिर किस तरह मजाक का विषय बन सकती है? उन्होंने कहा कि क्या किसी बुजुर्ग मां का सम्मान भी अब राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा बनाया जाएगा?उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में ‘मां’ सम्मान और संस्कार का सर्वोच्च प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में मां से जुड़े किसी संवेदनशील प्रसंग को ठहाकों का विषय बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। राजनीतिक आलोचना और मिमिक्री लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा, प्रस्तुति और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना भी आवश्यक है।प्रमोद सागर ने राहुल गांधी से सवाल करते हुए कहा कि उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि मंच से हुए इस पूरे प्रसंग से वे सहमत हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन देश की जनता नेताओं से शालीनता, संवेदनशीलता और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा की अपेक्षा करती है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और कार्यों पर राजनीतिक आलोचना के लिए कांग्रेस के पास अनेक मुद्दे हो सकते हैं, लेकिन एक बुजुर्ग महिला और मातृशक्ति के सम्मान से जुड़े प्रसंग को हास्य का विषय बनाना उचित नहीं ठहराया जा सकता।प्रमोद सागर ने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने तथा मातृशक्ति एवं देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करने की अपेक्षा व्यक्त की।



