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दिल्ली से आया जांच का आदेश, फिर भी वन विभाग में कार्रवाई का इंतजार!भ्रष्टाचार के आरोपों पर केंद्र ने जांच और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी, 8 सितंबर के पत्र के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं—जांच की गति पर उठे सवाल।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर उठी शिकायत पर केंद्र सरकार की पहल के बावजूद अब तक कार्रवाई सामने नहीं आई है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन सुरक्षा प्रभाग ने 8 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) को शिकायत की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए थे।मंत्रालय के पत्र क्रमांक FPD-9/2/2026-FPD1/202313/2026 में शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच मौजूदा अधिनियमों, नियमों एवं विनियमों के प्रावधानों के अनुसार करने को कहा गया है। साथ ही जांच के बाद की गई कार्रवाई से मंत्रालय और शिकायतकर्ता को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।केंद्र ने जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन कार्रवाई कहां तक पहुंची?शिकायत में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। मामले को राज्य वन विभाग को भेजते हुए केंद्र ने जांच की जिम्मेदारी तय कर दी, लेकिन अब सवाल यह है कि 8 सितंबर को मिले निर्देशों के बाद राज्य स्तर पर जांच की वास्तविक स्थिति क्या है?क्या जांच अधिकारी या समिति गठित की गई?क्या संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच शुरू हुई?क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया?और सबसे महत्वपूर्ण—क्या अब तक कोई प्रारंभिक या विभागीय कार्रवाई की गई है?इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं।जांच की निष्पक्षता पर भी रहेगी नजरकेंद्र सरकार के मंत्रालय से शिकायत राज्य वन विभाग तक पहुंचने के बाद अब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो गई है। आरोप सही हैं या निराधार, इसका फैसला जांच के निष्कर्षों से ही होगा। लेकिन जब केंद्रीय मंत्रालय ने स्वयं शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जांच और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है, तब जांच में हो रही देरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।वन संरक्षण, वनीकरण और पर्यावरणीय योजनाओं के नाम पर सरकारी धन खर्च होता है। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत सामने आने पर उसका समयबद्ध परीक्षण जरूरी माना जाता है।

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