Newsछत्तीसगढ़

व्याख्याताओं के तबादला आदेशों पर गहराया विवाद, 700 से अधिक नामों वाली सूची में गड़बड़ी की आशंका; जीपीएम की शिक्षिका को रिलीव के बाद भी नहीं मिली जॉइनिंग।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए लगभग 700 से अधिक व्याख्याताओं एवं सहायक शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश अब प्रशासनिक सवालों के घेरे में आते दिखाई दे रहे हैं। स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद जहां कई शिक्षक नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने की तैयारी में हैं, वहीं कुछ आदेशों की प्रमाणिकता को लेकर संदेह और शिकायतों ने विभागीय प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।विभागीय सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद प्रदेश के कुछ जिलों में जिला शिक्षा अधिकारियों को संदिग्ध आदेशों पर तत्काल जॉइनिंग नहीं कराने के मौखिक निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में अब तक विभाग की ओर से कोई स्पष्ट लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते शिक्षकों और अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।इसी बीच जीपीएम जिले की एक महिला शिक्षिका का मामला भी सामने आया है, जिसने पूरी प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, उक्त शिक्षिका का स्थानांतरण आदेश रायपुर स्थित आश्रम शाला के लिए जारी किया गया था। आदेश के आधार पर उन्हें जीपीएम जिले से करीब एक सप्ताह पहले ही विधिवत रिलीव भी कर दिया गया, लेकिन रायपुर स्थित नवीन पदस्थापना स्थल पर अब तक उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। रिलीव होने के बाद भी जॉइनिंग नहीं मिल पाने से शिक्षिका के सामने प्रशासनिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई है।बताया जा रहा है कि स्थानांतरण सूची में नाम शामिल कराने को लेकर पहले से ही कई शिकायतें विभाग तक पहुंच रही थीं। कुछ मामलों में नियमों की अनदेखी कर मनचाही पदस्थापना प्राप्त करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे में यदि जारी सूची में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जी आदेश सामने आते हैं तो यह न केवल संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली बल्कि पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।मुख्यमंत्री की टीप के बाद भी उठ रहे सवालव्याख्याताओं के स्थानांतरण मामले में मुख्यमंत्री स्तर से अभ्यावेदनों के परीक्षण एवं नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद यदि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद जॉइनिंग रोकने जैसी स्थिति बन रही है तो यह स्कूल शिक्षा विभाग की आंतरिक जांच एवं निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा करता है।फिलहाल विभाग की ओर से संदिग्ध आदेशों, शिकायतों और जॉइनिंग रोकने संबंधी स्थिति पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिलों में मौखिक निर्देशों और शिक्षकों की परेशानियों ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।अब देखना होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग जारी स्थानांतरण सूची की पुनः समीक्षा करता है या नहीं, और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल व्याख्याताओं के तबादले की यह प्रक्रिया प्रशासनिक आदेश से आगे बढ़कर पारदर्शिता, जवाबदेही और विभागीय नियंत्रण क्षमता की परीक्षा बनती नजर आ रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!