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बिलासपुर से दिल्ली तक बढ़ती तोखन साहू की चर्चा: क्या छत्तीसगढ़ की राजनीति को मिल रहा है भावी मुख्यमंत्री का नया चेहरा?**विजय शर्मा, ओमप्रकाश चौधरी और रूप कुमारी चौधरी के साथ अब केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का नाम भी संभावित राजनीतिक विकल्पों की चर्चा में; भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर कयास तेज.. पढ़ें पूरी खबर।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में भविष्य के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार एक बार फिर गर्म है। हालांकि वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है और भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री परिवर्तन अथवा उत्तराधिकार को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन आने वाले वर्षों की राजनीति को लेकर विभिन्न नामों पर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। इन्हीं चर्चाओं में अब बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का नाम तेजी से उभर रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों और भाजपा के अंदरूनी हलकों में यह सवाल पूछा जाने लगा है कि यदि भविष्य में छत्तीसगढ़ भाजपा को नए नेतृत्व के चेहरे पर विचार करना पड़ा, तो क्या बिलासपुर लोकसभा के सांसद तोखन साहू भी उस दौड़ में महत्वपूर्ण दावेदार बन सकते हैं? फिलहाल यह पूरी चर्चा राजनीतिक कयासबाजी और संभावनाओं के दायरे में है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में उनके बढ़ते कद को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।तोखन साहू वर्तमान में बिलासपुर से सांसद होने के साथ केंद्र सरकार में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद उन्हें केंद्र में मंत्री पद मिलना उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। संसदीय आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार वे 18वीं लोकसभा में बिलासपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और केंद्र में मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।संगठन और सत्ता के बीच तोखन की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यतातोखन साहू की राजनीतिक यात्रा की खासियत यह रही है कि उन्होंने अपनी शुरुआत स्थानीय और जमीनी राजनीति से की। विधायक से सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री तक पहुंचने का उनका सफर भाजपा की उस राजनीतिक शैली को भी दर्शाता है, जिसमें संगठन से निकले नेताओं को समय-समय पर बड़े अवसर दिए जाते रहे हैं।बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति का महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां से सांसद बनने के बाद केंद्रीय मंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय तोखन साहू का कद स्वाभाविक रूप से बढ़ा है। भाजपा के लिए वे ओबीसी और विशेष रूप से साहू समाज के व्यापक सामाजिक आधार से जुड़े नेता के रूप में भी देखे जाते हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद की राजनीति केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता से तय नहीं होती। इसके लिए संगठन में स्वीकार्यता, केंद्रीय नेतृत्व का विश्वास, सामाजिक समीकरण, प्रशासनिक क्षमता, विधानसभा में समर्थन और चुनावी जीत की क्षमता—इन सभी का मेल जरूरी होता है। इसी कसौटी पर भविष्य की राजनीति को देखा जाए तो तोखन साहू का नाम चर्चा में आना राजनीतिक रूप से अस्वाभाविक नहीं माना जा रहा है।विजय शर्मा का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में क्यों?भविष्य के मुख्यमंत्री पद की चर्चाओं में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का नाम लंबे समय से प्रमुखता से लिया जाता रहा है। वर्तमान सरकार में उनके पास गृह एवं जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है। वे सरकार के साथ-साथ संगठन की राजनीति में भी प्रभावशाली भूमिका रखते हैं।राजनीतिक तौर पर विजय शर्मा की छवि एक आक्रामक, सक्रिय और संगठन से जुड़े नेता की रही है। कवर्धा से उनकी चुनावी जीत, प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक अनुभव और उप मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी उन्हें भविष्य की राजनीति में स्वाभाविक रूप से मजबूत बनाती है।लेकिन भाजपा की राजनीति में अंतिम फैसला केवल वर्तमान पद से नहीं होता। केंद्रीय नेतृत्व कई बार ऐसे नामों पर दांव लगाता है, जिनकी चर्चा पहले व्यापक रूप से नहीं होती। छत्तीसगढ़ की राजनीति ने स्वयं इसका अनुभव देखा है। यही कारण है कि भविष्य के मुख्यमंत्री की चर्चा में विजय शर्मा का नाम भले मजबूत हो, लेकिन इसे किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं माना जा सकता।ओमप्रकाश चौधरी: प्रशासनिक अनुभव से राजनीतिक नेतृत्व तकवित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी का नाम भी भविष्य के नेतृत्व की दौड़ में लगातार लिया जाता है। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी से सक्रिय राजनीति में आए ओमप्रकाश चौधरी ने कम समय में भाजपा की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। वित्त, वाणिज्यिक कर, आवास एवं पर्यावरण सहित महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी उनके पास रही है।उनकी पहचान युवा, प्रशासनिक समझ रखने वाले और विकास एवं अर्थव्यवस्था पर पकड़ रखने वाले नेता के रूप में बनाई गई है। सरकार के आर्थिक फैसलों और बजटीय प्रबंधन में उनकी भूमिका ने उनके राजनीतिक महत्व को और बढ़ाया है।राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि भाजपा भविष्य के नेतृत्व के लिए अपेक्षाकृत युवा चेहरे को आगे बढ़ाना चाहे तो ओमप्रकाश चौधरी की दावेदारी स्वाभाविक रूप से मजबूत हो सकती है। लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में सामाजिक समीकरण और व्यापक राजनीतिक जनाधार मुख्यमंत्री पद के चयन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनकी ताकत और सीमाओं का मूल्यांकन भी इन्हीं राजनीतिक परिस्थितियों में किया जाएगा।रूप कुमारी चौधरी की नई राष्ट्रीय जिम्मेदारी ने बढ़ाया राजनीतिक कदमहासमुंद से सांसद रूप कुमारी चौधरी का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से सामने आया है। हाल ही में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनका राजनीतिक महत्व और बढ़ा माना जा रहा है।किसी प्रदेश की महिला सांसद को राष्ट्रीय संगठन में इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं माना जाता। इसके राजनीतिक संदेश भी होते हैं। राष्ट्रीय महिला मोर्चा का नेतृत्व उन्हें देशभर की महिला कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक संरचना से सीधे जोड़ता है।भाजपा में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति के बीच रूप कुमारी चौधरी का राष्ट्रीय स्तर पर उभार छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। भविष्य में प्रदेश नेतृत्व के विकल्पों पर चर्चा होगी तो उनका नाम भी राजनीतिक समीकरणों के अनुसार नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।तोखन साहू के पक्ष में क्या हैं बड़े राजनीतिक समीकरण?तोखन साहू के नाम को लेकर चर्चा की सबसे बड़ी वजह उनका वर्तमान केंद्रीय मंत्री होना है। भाजपा की राजनीति में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई नेता केंद्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हो, उसके पास संसदीय अनुभव हो और वह बड़े सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता हो, तो उसका नाम भविष्य की प्रदेश राजनीति में स्वाभाविक रूप से उभर सकता है।इसके अलावा बिलासपुर संभाग की राजनीतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण है। भाजपा के लिए यह क्षेत्र लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। तोखन साहू के केंद्रीय राजनीति में पहुंचने से इस क्षेत्र की राजनीतिक ताकत को नया आयाम मिला है।उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनकी सरल और अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल कार्यशैली भी मानी जाती है। बड़े राजनीतिक विवादों से दूर रहकर संगठन और जनता के बीच संपर्क बनाए रखना भाजपा की राजनीति में कई बार लाभदायक साबित हुआ है।लेकिन मुख्यमंत्री बनने की राह केवल दिल्ली से नहीं गुजरतीराजनीतिक जानकारों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री होना मुख्यमंत्री पद की गारंटी नहीं है। छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनने के लिए राज्य की विधानसभा राजनीति, विधायकों के बीच स्वीकार्यता और प्रदेश संगठन में व्यापक समर्थन सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।तोखन साहू के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न यही होगा कि यदि भविष्य में उन्हें प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका के लिए देखा जाता है, तो उनका विधानसभा स्तर का राजनीतिक समीकरण कितना मजबूत होगा। मुख्यमंत्री पद के लिए अंततः विधानसभा की राजनीति में उतरना पड़ता है।इसके बावजूद भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली को देखते हुए किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। भाजपा ने कई राज्यों में ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है, जिनके नाम राजनीतिक गलियारों में पहले सीमित चर्चा में थे। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में भविष्य के नेतृत्व की चर्चा को केवल परंपरागत राजनीतिक समीकरणों से नहीं देखा जा सकता।भाजपा में अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के हाथ मेंछत्तीसगढ़ भाजपा में मुख्यमंत्री पद का भविष्य किसके हाथ होगा, इसका फैसला अंततः पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व, संसदीय बोर्ड और तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। वर्तमान समय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और सरकार की ओर से नेतृत्व परिवर्तन का कोई आधिकारिक संकेत नहीं है। इसलिए संभावित उत्तराधिकारियों पर चल रही चर्चा को फिलहाल राजनीतिक कयासबाजी और भविष्य की संभावनाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।लेकिन राजनीति में चर्चा कई बार भविष्य की दिशा तय करने वाले संकेत भी देती है। एक तरफ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का प्रशासनिक और संगठनात्मक प्रभाव है, दूसरी ओर वित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी का युवा और प्रशासनिक चेहरा है। महासमुंद सांसद रूप कुमारी चौधरी को राष्ट्रीय महिला मोर्चा की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका राष्ट्रीय कद बढ़ा है। वहीं बिलासपुर सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का दिल्ली में बढ़ता राजनीतिक महत्व नई राजनीतिक संभावनाओं को जन्म दे रहा है।छत्तीसगढ़ को अगला मुख्यमंत्री कौन देगा?आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ भाजपा के सामने नेतृत्व की नई पीढ़ी को लेकर कई सवाल खड़े होंगे। क्या पार्टी वर्तमान नेतृत्व के साथ ही आगे बढ़ेगी? क्या विधानसभा से कोई नया चेहरा उभरेगा? क्या केंद्रीय राजनीति से किसी नेता को प्रदेश की कमान सौंपी जाएगी? या फिर संगठन ऐसा नाम सामने लाएगा, जिसकी आज बहुत ज्यादा चर्चा भी नहीं है?इन्हीं सवालों के बीच तोखन साहू का नाम राजनीतिक चर्चा में एक नई संभावना के रूप में उभर रहा है। उनके समर्थकों का मानना है कि जमीनी राजनीति से केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंचने वाला नेता भविष्य में प्रदेश की बड़ी जिम्मेदारी संभालने की क्षमता रखता है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा के भीतर मजबूत होते नए नेतृत्व की स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा मान रहे हैं।फिलहाल मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई आधिकारिक दौड़ नहीं है और न ही भाजपा ने भविष्य के नेतृत्व पर कोई संकेत दिया है। लेकिन राजनीति में भविष्य की तस्वीर अक्सर वर्तमान की चर्चाओं में बनना शुरू हो जाती है। छत्तीसगढ़ की सत्ता के अगले अध्याय में विजय शर्मा, ओमप्रकाश चौधरी, रूप कुमारी चौधरी और अब तोखन साहू—इन नामों की चर्चा आने वाले समय में और तेज हो सकती है।सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को भविष्य का मुख्यमंत्री देने की तैयारी शुरू कर दी है, या यह सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चल रही संभावनाओं की चर्चा है? इसका जवाब समय और भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही देगा।

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