विकास नंद/ सर्वव्यापी
जिले के चिकित्सालयों में एंटीरेबीज टीका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा विभाग ने नागरिकों और पशुपालकों से रैबीज से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने तथा समय पर टीकाकरण कराने की अपील की है।रैबीज एक घातक वायरल बीमारी है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। संक्रमित स्तनधारी जीवों की लार के माध्यम से काटने या खरोंच लगने पर यह बीमारी मनुष्यों एवं अन्य पशुओं में फैल सकती है। अत्यधिक लार आना, मुंह से झाग निकलना, निगलने में कठिनाई, आवाज में बदलाव, धीरे-धीरे लकवे की स्थिति तथा पानी से डर या घबराहट इसके प्रमुख लक्षण हैं।उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि केवल स्तनधारी जीव ही रैबीज से संक्रमित होकर इसे फैला सकते हैं। चमगादड़ और लोमड़ी इसके प्रमुख वाहक माने जाते हैं, जबकि श्वान, बिल्ली, गाय, बकरी, भेड़ एवं बंदर के काटने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।उन्होंने बताया कि जिले में एंटीरेबीज टीका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वर्तमान में 12 मात्रा एंटीरेबीज टीका उपलब्ध है। संक्रमण से बचाव के लिए प्री-एक्सपोजर टीकाकरण वर्ष में एक बार तथा संक्रमण के बाद पोस्ट-एक्सपोजर टीकाकरण निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार 0, 3, 7, 14 एवं 28वें दिवस पर निःशुल्क लगाया जाएगा।पशुपालकों से अपील की गई है कि वे अपने पशुओं को रैबीज से सुरक्षित रखने के लिए निकटतम पशु चिकित्सक से संपर्क कर आवश्यक टीकाकरण अवश्य कराएं। वहीं, किसी पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति में लापरवाही न बरतते हुए तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें और निर्धारित टीकाकरण प्रोटोकॉल का पालन करें।




