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महिला नेतृत्व के भरोसे महासमुंद का ग्रामीण विकास, जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल और सीईओ अनुपमा आनंद पर टिकीं उम्मीदें।

विकास नंद/सर्वव्यापी

आकांक्षी जिला महासमुंद में ग्रामीण विकास को नई गति देने की जिम्मेदारी इस समय दो महिला नेतृत्वकर्ताओं के कंधों पर है। एक ओर जनप्रतिनिधि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल हैं, तो दूसरी ओर प्रशासनिक नेतृत्व संभाल रहीं युवा आईएएस अधिकारी एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अनुपमा आनंद। दोनों की भूमिका जिले में संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में मोंगरा पटेल पर पंचायतों को सशक्त बनाने, ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने तथा शासन की प्राथमिकताओं को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है। वहीं जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद के कंधों पर प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, जल संरक्षण, स्वच्छता, आजीविका मिशन, महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने की अहम जिम्मेदारी है।

इस नेतृत्व की एक दिलचस्प कड़ी यह भी है कि मोंगरा पटेल सरायपाली विकासखंड की स्थानीय निवासी हैं, जबकि आईएएस अधिकारी अनुपमा आनंद की पहली फील्ड पोस्टिंग भी सरायपाली में एसडीएम के रूप में हुई थी। सरायपाली में प्रशासनिक अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्हें पदोन्नति के उपरांत महासमुंद जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया। ऐसे में दोनों का सरायपाली से जुड़ाव और स्थानीय परिस्थितियों की समझ जिले के विकास कार्यों में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है।

प्रशासनिक अनुभव और जनप्रतिनिधित्व का यह समन्वय ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि जिला पंचायत अध्यक्ष और सीईओ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है, तो पंचायतों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना और अन्य विकास योजनाओं को अपेक्षित गति मिल सकती है।

महासमुंद जैसे आकांक्षी जिले में शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय को सबसे अहम माना जाता है। ऐसे में जिलेवासियों की निगाहें अब इस महिला नेतृत्व पर हैं कि वे आपसी सहयोग और बेहतर कार्यशैली के माध्यम से ग्रामीण विकास को कितनी नई दिशा और गति दे पाती हैं। आने वाला समय ही बताएगा कि यह तालमेल महासमुंद को विकास के नए आयाम तक पहुंचाने में कितना सफल साबित होता है।

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