तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

मुंगेली जिले के ग्राम निरजाम में सड़क पर लंबे समय से भरे गंदे पानी और जाम नालियों की समस्या अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम में सड़क पर पानी भरा हुआ है, नालियां जाम हैं और पूर्व सरपंच देवचरण साहू के घर के सामने भी लंबे समय से गंदे पानी का जमाव बना हुआ है। बताया गया है कि यह समस्या पिछले करीब एक वर्ष से बनी हुई है, जिसके कारण आसपास रहने वाले लोगों को आवागमन में परेशानी के साथ-साथ गंदगी और बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर ग्राम पंचायत को कई बार सूचना दी गई, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी रूप से नाली की सफाई अथवा जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। जब स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो शिकायतकर्ता ने अपनी समस्या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंचाई, ताकि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हो और ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही जलभराव एवं गंदगी की समस्या से राहत मिल सके।समस्या का समाधान या कागजों में निराकरण?
सबसे गंभीर सवाल अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के कथित निराकरण को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि संबंधित जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर के अधिकारी समस्या का वास्तविक समाधान कराने के बजाय ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर शिकायत के निराकरण की जानकारी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को भेज रहे हैं।यदि शिकायतकर्ता की बात सही है तो यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाकर उनका वास्तविक और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि मौके पर समस्या जस की तस बनी रहे और केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कर शिकायत को निराकृत दिखाया जाए, तो हेल्पलाइन की पूरी व्यवस्था पर ही सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक साल से जलभराव, फिर भी जिम्मेदार बेखबर क्यों?ग्राम निरजाम में एक वर्ष से सड़क पर पानी जमा होना और नालियों का जाम रहना केवल सफाई व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य और सुरक्षित आवागमन से जुड़ा गंभीर विषय है। गंदा पानी लंबे समय तक जमा रहने से मच्छरों एवं अन्य संक्रमण फैलाने वाले कारकों के पनपने की आशंका रहती है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
सवाल यह है कि जब समस्या इतनी पुरानी है और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंच चुकी है, तब संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर स्थायी जल निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं कराई? क्या केवल पंचायत प्रतिनिधियों से जानकारी लेकर शिकायत को समाप्त मान लेना ही समस्या का समाधान है?
पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव के आरोप की भी हो जांचग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे इन आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है कि समस्या का समाधान कराने के बजाय ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
यदि वास्तव में अधिकारियों द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों से दबावपूर्वक शिकायत के निराकरण की जानकारी भेजवाई जा रही है, तो यह न केवल प्रशासनिक जवाबदेही का विषय है, बल्कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
प्रशासन को चाहिए कि शिकायत को केवल दस्तावेजों में निराकृत करने के बजाय मौके पर टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करे, जाम नालियों की सफाई कराए, सड़क पर जमा गंदे पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे और शिकायतकर्ता से सीधे संपर्क कर यह पता लगाए कि समस्या वास्तव में दूर हुई है या नहीं।
ग्रामीण पूछ रहे—‘पानी वहीं है तो शिकायत कैसे निराकृत हो गई?’ग्राम निरजाम की यह शिकायत अब एक बड़े सवाल का रूप लेती जा रही है कि सरकारी शिकायत प्रणाली में आम ग्रामीण की समस्या का समाधान जमीन पर होता है या केवल कागजों में? यदि सड़क पर पानी, जाम नाली और गंदगी आज भी मौजूद है तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के निराकरण की जानकारी आखिर किस आधार पर भेजी जा रही है?
मुंगेली जिला प्रशासन और संबंधित जनपद एवं जिला पंचायत अधिकारियों को चाहिए कि वे मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र रूप से स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव डालकर शिकायत निराकृत कराने के लगाए जा रहे आरोपों की भी जांच की जाए, ताकि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था पर ग्रामीणों का भरोसा कायम रह सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन ग्राम निरजाम की सड़क और नाली की समस्या को वास्तव में दूर करता है या फिर एक बार फिर कागजों में ही ‘निराकरण’ कर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत को बंद कर दिया जाता है।




