
विकास नंद/ सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में जिला प्रशासन के कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का रुख सख्त होता नजर आ रहा है। राज्य के कुछ जिलों में आमजन की शिकायतों के निराकरण में देरी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों में अपेक्षित तेजी नहीं आने को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर नाराजगी की चर्चा है। ऐसे में कामकाज में सुस्ती बरतने वाले कलेक्टरों पर आने वाले दिनों में गाज गिरने की संभावना को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है।सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल सहित आम जनता से सीधे जुड़े मुद्दों पर मिलने वाली शिकायतों को मुख्यमंत्री गंभीरता से ले रहे हैं। खासतौर पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज शिकायतों के समय-सीमा में निराकरण को लेकर जिला प्रशासन की जवाबदेही तय की जा रही है।
कलेक्टरों से सीधे फोन पर संवाद
मुख्यमंत्री साय स्वयं कलेक्टरों से दूरभाष पर संवाद कर जिलों में शिकायतों की स्थिति और उनके निराकरण की जानकारी ले रहे हैं। लंबित मामलों के कारणों की जानकारी लेने के साथ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं कि आमजन की समस्याओं का निर्धारित समय-सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए।मुख्यमंत्री की इस सीधी निगरानी से जिला प्रशासन में यह संदेश गया है कि केवल शिकायतों का पंजीयन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके वास्तविक और संतोषजनक निराकरण पर भी नजर रखी जाएगी।
सड़क-स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे मामलों पर विशेष नजर
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़क की खराब स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, स्कूलों से जुड़ी समस्याएं, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर आने वाली शिकायतें जनता से सीधे जुड़ी होती हैं। इन मामलों में अनावश्यक देरी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।मुख्यमंत्री की प्राथमिकता आम नागरिकों को समय पर सरकारी सेवाओं का लाभ दिलाना और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना है। इसी वजह से जिला स्तर पर अधिकारियों के प्रदर्शन और लंबित शिकायतों की स्थिति पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
लापरवाही पर जवाबदेही तय होने के संकेत
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक जिन जिलों में शिकायतों के निराकरण की गति धीमी है अथवा बार-बार एक जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, वहां अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा गंभीरता से की जा सकती है। माना जा रहा है कि समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।हालांकि, फिलहाल किन कलेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होगी या तबादला किया जाएगा, इसे लेकर कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। ऐसे में सुस्त कलेक्टरों पर गाज गिरने की चर्चा को संभावित प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर ही देखा जा रहा है।
सीएम का संदेश—जनता की समस्या को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री साय का फोकस स्पष्ट रूप से इस बात पर है कि आम जनता को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। शिकायतों का समयबद्ध निराकरण, अधिकारियों की जवाबदेही और जनता से सीधा संवाद सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी समीक्षा में किन जिलों के कामकाज पर मुख्यमंत्री की नाराजगी सामने आती है और क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई होती है।



